Ekşi maya maceram bir süredir durulmuştu, ta ki Lezzet'te gördüğüm çikolatalı ekşi mayalı ekmek tarifi tekrar heveslendirene kadar. Ekşi mayanın zamana yayılan o doğal lezzetiyle çikolatanın aromasını bir araya getirme fikri bana çok cazip geldi.
Tarifin söylediğine göre ortaya yumuşacık bir iç doku, çıtır bir kabuk ve damakta kalan hafif bitter bir tat çıkıyor. Kahvaltıda ya da çay saatinde tatlıya alternatif olarak sunulabiliyor. Bir porsiyonu 220 kalori, hazırlığı yaklaşık 6 saat, pişirmesi 40 dakika, 6 kişilik.
İlk denememde sabırlı olmanın ne kadar önemli olduğunu bir kez daha anladım. Ekşi maya öyle aceleye gelmiyor; hamurun kabarmasını beklemek, sonra da fırının kokusunu evin her yerine yaymasına izin vermek gerekiyor. Sonuç gerçekten klasik ekmek tariflerinden sıkılanlar için yepyeni bir deneyim.
Şimdi bu çikolatalı versiyon hafta sonu ritüelim oldu diyebilirim. Ekşi maya beslemek zaten keyifli, bir de içine biraz çikolata girince iş büsbütün gurmeleşiyor. Denemek isteyenlere tavsiyem: başlamadan önce mayanızın diri olduğundan emin olun.
Kaynak: Lezzet
The Perfect Loaf के Maurizio Leo ने Grain Gathering के बारे में लिखा है, जिसका आयोजन WSU Breadlab और वाशिंगटन राज्य के कृषि विभाग ने 19 से 21 जुलाई तक Skagit Valley में किया। यह आठ साल में पहला जमावड़ा था, जिसका विषय था "Nourishing Communities" (पोषण देने वाले समुदाय)। वे एक होम बेकर के तौर पर ब्रीडर्स, किसानों, मिलरों और पेशेवर बेकरों के बीच पहुंचे थे।
उनके लिए सबसे खास चीज़ Marc Benoit का बनाया मोबाइल बेकरी और मिल था, जो एक ट्रक में लगा था। ओवन, मिल, मिक्सर और वर्कबेंच सब सोलर पैनलों से चलते थे। Hollis, Chimacum Confluence और Elwha River Spelt जैसे अनाजों से टीम ने सोरडो कंट्री लोफ, फोकाशिया, बैगेट और बियाली बनाए। ट्रक का मकसद खेत से रोटी तक की दूरी घटाना है, थैले पर किसान का नाम हो और पैसे का ज़्यादा हिस्सा उत्पादक के पास रहे।
दो बातें बार-बार उठीं। पहली, कमोडिटी अनाज की पहचान मिट जाती है, इसलिए मिट्टी की देखभाल और किसान की मेहनत का कोई मोल नहीं मिलता। दूसरी, ज़्यादातर गेहूं उपज, एकरूपता, रोग-प्रतिरोध और बेकिंग प्रदर्शन के लिए उगाया जाता है, और स्वाद व पोषण उस सूची में नहीं होते। Breadlab इन्हें भी स्कोरकार्ड में शामिल करता है: Skagit 1109, Salish Blue और Ruth जैसी किस्में उगाकर उन्हें पीसता और बेक करता है, ताकि देखा जाए कि वे कैसा प्रदर्शन करती हैं।
होम बेकरों के लिए उनका निष्कर्ष सादा है: किसी एक अनाज को पहचान वाली किस्म से बदल लें, या सीधे किसी फार्म से खरीदकर घर पर पीस लें। उनकी अपनी बेकिंग भी साबुत अनाज, नामवाली किस्मों और ताज़ा पिसे आटे की ओर जा रही है, हालांकि वे मानते हैं कि अच्छे छने आटे की भी जगह है।
मुझे यहाँ यह बात पसंद आई कि किण्वन जवाब का हिस्सा है, पूरा जवाब नहीं। स्वादिष्ट अनाज से शुरुआत करने पर आपके स्टार्टर को भी कुछ ऐसा मिलता है जिसके साथ काम करना सार्थक है।
स्रोत: The Perfect Loaf
अचार वाले खीरे और सॉरक्राउट पोलैंड की क्लासिक चीज़ें हैं, लेकिन एक लेख में याद दिलाया गया कि लगभग हर सब्ज़ी को लैक्टिक एसिड किण्वन से संरक्षित किया जा सकता है। लेखकों के अनुसार पुरानी रेसिपी फिर से चलन में आ रही हैं और लोग संरक्षित खाद्य पदार्थों के साथ प्रयोग करने में ज़्यादा रुचि ले रहे हैं।
प्रक्रिया सरल है: लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया, जो बिना ऑक्सीजन के काम करते हैं, सब्ज़ियों की शर्करा को लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं। यही एसिड लंबी शेल्फ लाइफ और खास खट्टे स्वाद का कारण है। किण्वित खाद्य पदार्थ प्रोबायोटिक्स का स्रोत भी हैं, जो आंतों और खनिजों के अवशोषण में मदद करते हैं।
असामान्य विकल्पों में लाल चुकंदर है, जो घर के चुकंदर के खट्टे पानी का आधार है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा और हल्का मिट्टी जैसा होता है और रंग खूबसूरत गहरा लाल। फिर गाजर आती है, जिसकी प्राकृतिक मिठास किण्वन से निखरती है और मिर्च या अदरक के साथ तीखा स्वाद पाती है। लहसुन किण्वन के बाद अपनी तीखी धार खो देता है और नरम हो जाता है, जो सॉस, पेस्ट और सैंडविच के लिए अच्छा है। अंत में मूली, जो कुरकुरी हो जाती है और उसकी तीखापन कम हो जाता है; यह सोवा, लहसुन या तेज पत्ते के साथ अच्छी लगती है।
मुझे यह तरीका पसंद है, क्योंकि यह दिखाता है कि अचार बनाना केवल खीरे के एक जार तक सीमित नहीं है। अगर बगीचे में मूली या गाजर की भरपूर फसल हो, तो नमकीन पानी उन्हें लंबे समय तक रखने का आसान तरीका है। पतझड़ में जब घर ठंडा होने लगता है, तो किण्वन बस थोड़ा लंबा चलता है।
स्रोत: ESKA.pl
मैंने हाल ही में घर पर बने फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों पर एक हल्की-फुल्की गाइड पढ़ी, और मुझे लगा कि इसे यहाँ साझा करना ठीक रहेगा। मूल बात सीधी है: सब्ज़ियों, फलों और अनाज से लेकर दूध, दालों और यहाँ तक कि अंडों तक, कई चीज़ों को फर्मेंट किया जा सकता है, बशर्ते प्रक्रिया ठीक से नियंत्रित हो।
लेख में बताई गई दस रेसिपी काफ़ी विविध हैं। बंद बर्तन में लगभग दो दिन रखी जाने वाली पत्तागोभी, मूली, लहसुन, मिर्च और अदरक वाली किमची है। पारंपरिक सावरक्राउट है, जिसे क्लोरीन-मुक्त पानी में भिगोकर कमरे के तापमान पर 3 से 7 दिन फर्मेंट किया जाता है, फिर फ्रिज में रखा जाता है। इसके अलावा लहसुन का अचार, खीरे के अचार के दो तरीके, और चेडर, टर्की व क्रैनबेरी सॉस वाला सोर्डो सैंडविच है जिसे तवे पर सेंका जाता है।
मुझे सबसे ज़्यादा दिलचस्प लगा पेय और प्रोटीन वाले व्यंजनों का हिस्सा। कोम्बुचा काली या हरी चाय, चीनी, कोम्बुचा स्टार्टर और एक SCOBY से बनता है, और छायादार जगह पर 7 से 10 दिन फर्मेंट होने के बाद बोतलों में 1 से 3 दिन रखकर कार्बोनेशन लिया जाता है। टेम्पे 250 ग्राम सोयाबीन से बनता है, जिन्हें दो दिन भिगोकर छीला जाता है, उबाला जाता है, सुखाया जाता है, स्टार्टर कल्चर मिलाया जाता है और लगभग 30 घंटे के लिए 30 से 40 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है। दही और ताज़ा पनीर भी सूची में हैं, साथ में तापमान और समय दिया गया है।
एक बात ईमानदारी से कहना चाहूँगा: लेख के स्वास्थ्य संबंधी दावे ज़्यादातर दूसरी किताबों और वेबसाइटों का हवाला देते हैं, उनके पीछे कोई क्लिनिकल प्रमाण नहीं है, इसलिए इन्हें सामान्य जानकारी के तौर पर ही पढ़ना बेहतर है। कच्चे और पके सोयाबीन के बीच टेम्पे की मात्राएँ भी पूरी तरह एक-सी नहीं हैं। फिर भी घर पर फर्मेंटेशन शुरू करने के विचारों की सूची के रूप में यह लेख व्यावहारिक है और इसे आसानी से अपनाया जा सकता है।
जो लोग यहाँ अभी शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए मेरी निजी सलाह है: पहले सबसे सरल रेसिपी चुनें, सच में साफ़ बर्तन इस्तेमाल करें, और तापमान व फर्मेंटेशन का समय लिख लें। इसी से आप जान पाएँगे कि कौन-सा स्वाद आपको सबसे ज़्यादा पसंद है।
स्रोत: HaiBunda
एक इंटरव्यू ने मेरा ध्यान खींचा, जिसमें खाद्य तकनीकी विशेषज्ञ Mario Sánchez Rosagro एक ऐसी बात की ओर इशारा करते हैं जो हम में से कई लोगों ने देखी है, पर कभी उसका नाम नहीं दिया: केफ़िर हर्बल दुकानों की अलमारी से निकलकर सुपरमार्केट के फ़्रिज़ के बड़े हिस्से में पहुँच गया है, और इतनी विविधता में यह जानना मुश्किल है कि हम असल में क्या खरीद रहे हैं।
उनका कहना है कि स्पेन में बिकने वाले लगभग 80% केफ़िर पूरी तरह केफ़िर न हों। कोडेक्स एलिमेंटेरियस की परिभाषा के अनुसार यह केफ़िर के दानों से तैयार एक कल्चर है, जिसमें लैक्टिक और एसिटिक बैक्टीरिया यीस्ट के साथ रहते हैं। अगर सामग्री की सूची में केवल चुने हुए बैक्टीरिया हों और यीस्ट का ज़िक्र न हो, तो उत्पाद केफ़िर जैसा दिखता है पर केफ़िर नहीं है। इसके अलावा यूरोप में कानूनी खाली जगह है, जिससे यह शब्द साफ़ नहीं होता।
घर पर फ़र्मेंट करने वालों के लिए कुछ उपयोगी बातें हैं। असली केफ़िर में यीस्ट की वजह से हल्का बुलबुलापन हो सकता है और अल्कोहल के बेहद कम अंश (लगभग 0.004 से 0.005%) मिल सकते हैं, जिसे विशेषज्ञ पारंपरिक किण्वन का संकेत मानते हैं। गाढ़ापन भी नकली होने का सबूत नहीं है; वह छानने के तरीके या बाद में मिलाए गए दूध के ठोस तत्वों पर निर्भर करता है, दानों पर नहीं।
समझदारी से खरीदने के लिए उनकी सलाह है कि देखें कि केफ़िर के लिए खास किण्वक और यीस्ट लिखे हों, लेबल पर जीवित और सक्रिय कल्चर लिखा हो, और बिना मिलाई गई चीनी वाले संस्करण चुनें। वे यह भी बताते हैं कि यह सोर्डो जैसा है, क्योंकि बैक्टीरिया और यीस्ट संतुलन में मिलकर काम करते हैं, भले ही आधार और परिस्थितियाँ अलग हों।
मेरे हिसाब से यह अपने दाने खुद उगाने का एक और अच्छा कारण है: कम से कम पता रहता है कि बोतल में क्या है।
स्रोत: Directo al Paladar
Ekşi mayayla uğraşan biri olarak bu hikâye beni çok etkiledi. Artvin'in yüksek rakımlı Şavşat köylerinde, kışın karın yer yer iki metreyi aştığı yerlerde, ekşi mayalı köy ekmeği hâlâ nesillerdir korunan bir yöntemle yapılıyor.
En sevdiğim ayrıntı hamur teknesi. Tekneler yaşlı ıhlamur ağaçlarının gövdesinden tek parça oyuluyor. Ihlamur kokusuz ve reçinesiz, üstelik iyi bir ısı yalıtıcısı: oda sıcaklığı sıfırın altına düşse bile hamurun sıcaklığını saatlerce koruyor, böylece fermantasyon soğuk şoku yaşamadan yavaş ve dengeli ilerliyor. Tekne deterjanla yıkanmıyor; hamur artıkları tahta spatulayla kazınıp kuru bezle siliniyor, ahşaptaki doğal flora da her yeni hamura geçiyor.
Maya burada "ana maya" ya da "hamur başı" diye anılıyor. Her pişirimden sonra yumruk büyüklüğünde bir parça ayrılıyor, yerel unla beslenip serin kilerde bez torbada saklanıyor. Un ise yerel sarı buğday, kavuzlu kızıl buğday ve biraz çavdarın su değirmenlerinde tam tane öğütülmüş karışımı.
Hamur teknede yarım saatten fazla yoğruluyor. 4–6 saatlik ilk mayalanmadan sonra 2–3 kiloluk somunlara ayrılıyor ve meşe, gürgen odunuyla ısıtılmış kubbe biçimli taş fırınlarda pişiyor. Kalın kabuk nemi içeride tuttuğu için somunlar serin kilerde 20–30 gün taze kalabiliyor.
Evde benzer bir kabuk için önerilen yöntem: fırın taşı ya da döküm tencere kullanmak ve pişirmenin ilk 20 dakikasında fırına kaynar su kabı koyarak buhar vermek. Bir de sabır: büyük somunları fırından çıkar çıkmaz kesmeyip 8–12 saat keten örtü üzerinde dinlendirmek.
Kaynak: Mutfak Magazin
Plötzblog पर एक रेसिपी प्रकाशित हुई है, जो मूल रूप से अप्रैल 2023 के आल्म कोर्स के लिए परिचयात्मक ब्रेड के रूप में बनाई गई थी: राई-पीला अनाज ब्रेड, राई और पीले-दाने वाले गेहूं से बना साबुत अनाज का खट्टे आटे वाला ब्रेड।
पीले-दाने वाला गेहूं एक ऐसा गेहूं है जिसकी भूसी और अंदर का आटा बहुत पीला होता है। पीले रंग के वर्णक आटे और ब्रेड को कम “साबुत अनाज” जैसा दिखाते हैं, और स्वाद भी काफी अलग होता है। लेकिन धोखे में न आएं: पीले-दाने वाले गेहूं के भीतर भी कई अलग-अलग किस्में होती हैं। इस ब्रेड के लिए डार्ज़ाउ के Cultivari अनाज प्रजनन केंद्र की कई किस्मों का मिश्रण इस्तेमाल हुआ है।
ब्रेड का फूलना पूरी तरह खट्टे आटे (सोरडो) से आता है। इस रेसिपी में साबुत राई के आटे और गेहूं के आटे का मिश्रित खट्टा आटा उपयोग होता है, जिसे नरम राई के स्टार्टर (TA 200) से शुरू करके 20 °C पर 12 घंटे पकने दिया जाता है। फिर मुख्य आटा बनाया जाता है। सटीक मात्रा और चरण रेसिपी में ही दिए गए हैं, जहां आटे की मात्रा भी बदली जा सकती है।
सबसे ज़्यादा मुझे इस विचार ने आकर्षित किया कि अनाज को बदले जा सकने वाला कच्चा माल न मानकर, उसकी अपनी किस्म और अपना स्वाद समझा जाए। अगर आपके पास खट्टा आटा (स्टार्टर) है और आप ऐसी ब्रेड चाहते हैं जो सामान्य साबुत आटे की ब्रेड जैसी न दिखे, तो पीले-दाने वाला गेहूं खोजने का यह अच्छा कारण है।
स्रोत: Plötzblog
Plötzblog पर नया: कद्दू के बीज वाली एक ग्रैहम ब्रेड, जो शुद्ध गेहूं की साबुत अनाज वाली खट्टे आटे (सोरडो) की ब्रेड है। इसकी खासियत एक ऐसी सामग्री है जो आमतौर पर फेंक दी जाती है। कद्दू के बीज का तेल निकालते समय जो अवशेष बचता है, उसे यहां सुखाकर पीसा जाता है और स्वाद व स्वास्थ्य के लिए ब्रेड में पकाया जाता है। इसके अलावा अतिरिक्त कद्दू के बीज भी डाले गए हैं, जो ब्रेड को चबाने में एक दिलचस्प बनावट देते हैं।
ग्रैहम आटा, जो गेहूं का बारीक पिसा हुआ दलिया है, ब्रेड में कुरकुरापन और फाइबर लाता है। रेसिपी में एक ज़रूरी सावधानी दी गई है: आटे को अच्छी तरह गूंथना और मज़बूती से आकार देना ज़रूरी है। अगर यह सही हो जाए, तो विवरण के अनुसार बेहद मुलायम साबुत अनाज वाली ब्रेड बनती है, जो बिना किसी यीस्ट के सिर्फ खट्टे आटे से फूलती है।
खट्टा आटा नरम गेहूं के स्टार्टर (TA 200) से शुरू होता है और 20 °C पर 12 घंटे पकता है। रेसिपी में यह भी बताया गया है कि रसोई का तापमान बदलने पर खट्टे आटे और अन्य आटों का तापमान कैसे नियंत्रित करें।
मुझे ऐसी रेसिपी पसंद हैं जो बचे हुए और उप-उत्पादों को किसी अच्छी चीज़ में बदल दें। और सिर्फ खट्टे आटे से फूली साबुत अनाज की ब्रेड हमेशा यह दिखाती है कि एक अच्छी तरह संभाली गई स्टार्टर क्या कर सकती है।
स्रोत: Plötzblog
एक सोरडो जो गर्मी के अंत का जश्न मनाता है। Breadtopia का Harvest Corn Sourdough दो तरह के मक्के का इस्तेमाल करता है: खेत के मक्के या बारीक मक्के के आटे से बना दलिया, और साबुत मीठे मक्के के दाने जो आटे में मोड़ दिए जाते हैं।
यह विचार पिछले साल के जमे हुए मक्के के एक छोटे से पैकेट से आया, जिसे लेखक ने फ्रीजर भरते समय ढूंढा था। हर साल वे स्थानीय फार्म स्टैंड से एक दर्जन भुट्टे लेते हैं, उन्हें उबालते हैं, दाने काटते हैं और जमा देते हैं। पोस्ट की एक उपयोगी सलाह: मीठे मक्के का दूध निकालने के लिए भुट्टों को चाकू की पीठ से खुरचें, और ब्लांचिंग का चरण न छोड़ें, क्योंकि यह उन एंज़ाइम्स को रोकता है जो फ्रीज़र में मक्के का स्वाद और बनावट बदल देते।
मात्राएँ सीधी हैं। आटे में 390 ग्राम ब्रेड का आटा, 280 ग्राम पानी, 80 ग्राम स्टार्टर और 9 ग्राम नमक है, साथ में 60 ग्राम बारीक मक्के के आटे और 100 ग्राम उबलते पानी से बना ठंडा दलिया, और 120 ग्राम मीठे मक्के के दाने। मिलाने के लगभग एक घंटे बाद दलिया और दाने आटे में परतों में मिलाए जाते हैं, फिर दो दौर स्ट्रेच और फोल्ड होते हैं। तैयारी में लगभग 40 मिनट और बेकिंग में 35 मिनट लगते हैं।
डिब्बाबंद की जगह ताज़ा या ताज़ा जमाया मक्का बेहतर बताया गया है, क्योंकि वह ज़्यादा मीठा होता है, और दलिया के लिए घर पर पीसे पीले डेंट मक्के को अच्छा विकल्प बताया गया है। लेखक इसे देर-गर्मी की सब्ज़ियों के साथ टेबल ब्रेड की तरह परोसते हैं, या सैंडविच, टोस्ट और यहाँ तक कि फ्रेंच टोस्ट के लिए इस्तेमाल करते हैं।
यह याद दिलाने वाली अच्छी पोस्ट है कि सोरडो मौसमी सामग्री के लिए बेहतरीन आधार है। मुझे पसंद है कि दलिया वाला चरण प्रक्रिया को ज़्यादा जटिल किए बिना नमी और मक्के का स्वाद जोड़ता है।
स्रोत: Breadtopia
Breadtopia का नया सोरडो वियना के पास Öfferl बेकरी की एक ब्रेड से प्रेरित है, जिसे बेकरी अखरोट जैसा, मसालेदार और रसीला बताती है। एक दोस्त ने बेकर को रेसिपी भेजी थी, और सबसे पहले पानी के तापमान ने ध्यान खींचा: लेवेन और अंतिम आटा, दोनों 42 डिग्री सेल्सियस (लगभग 107 फ़ारेनहाइट) के पानी से गूंथे जाते हैं, जो सोरडो के लिए सामान्य से कहीं ज़्यादा गर्म है।
लेखक को तो यह भी शक हुआ कि शायद अनुवाद में गलती है, लेकिन जर्मन मूल पाठ पढ़ने पर उन्हें लगा कि ऊंचा तापमान शायद कुछ लैक्टोबैसिलाई के लिए रखा गया है, जो दही जैसे, दूध जैसे स्वाद देते हैं। इसे पक्का करने के लिए उन्होंने रातभर वाले दो लेवेन बनाए: एक 107 डिग्री पानी से और दूसरा 75 डिग्री पानी से। सुबह दोनों दोगुने हो गए थे, लेकिन गर्म वाले में लैक्टिक खटास ज़्यादा महसूस हुई, जबकि ठंडा वाला अखरोट जैसा और कम खट्टा था। मेरी नज़र में यह एक सरल और साफ़ उदाहरण है कि तापमान किण्वन के स्वाद को कैसे दिशा देता है।
इस ब्रेड में एक स्कॉल्ड तकनीक भी इस्तेमाल होती है, जिसमें कुछ सामग्री, यहाँ खोरासान, राई, अलसी, कुट्टू के दाने और सूरजमुखी के बीज, उबलते पानी में मिलाए जाते हैं। इससे स्टार्च जेल जैसा हो जाता है और आटा ज़्यादा पानी थाम सकता है, जो शायद रसीले भीतरी हिस्से की वजह है।
यह रूपांतरित संस्करण एक छोटे पुलमन साँचे में बेक होता है, जिसमें आइनकॉर्न की जगह स्पेल्ट और एमर की जगह खोरासान है। लेखक सुझाते हैं कि अनाज और बीज वही रखें जो आपके पास हों, और लक्ष्य एक ढीला, चिपचिपा आटा रखें। यहाँ तराज़ू और थर्मामीटर ज़रूरी हैं।
लेवेन के तापमान को कमरे पर छोड़ने के बजाय जानबूझकर नियंत्रित करने का विचार मुझे आकर्षक लगा। अगर आप सोरडो के खट्टे स्वाद को पसंद करते हैं, तो इस रेसिपी को बुकमार्क कर लेना अच्छा रहेगा।
स्रोत: Breadtopia
मुझे एक आम धारणा पर एक दिलचस्प लेख मिला: कि सावर्डो ब्रेड खाने से वज़न कम बढ़ता है। ताइवान की डाइटीशियन यांग सिहान ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह एक मिथक है।
पहले दोनों ब्रेड का फर्क समझते हैं। सावर्डो आटे और पानी से उगाए गए जंगली यीस्ट और लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया पर निर्भर करता है, और उसका धीमा, लंबा फर्मेंटेशन उसे हल्की खट्टी खुशबू देता है। साधारण सफ़ेद ब्रेड व्यावसायिक इंस्टेंट यीस्ट इस्तेमाल करती है, इसलिए उसका फर्मेंटेशन कम समय का होता है और बनावट ज़्यादा नरम और महीन होती है। लेकिन 100 ग्राम के हिसाब से दोनों की कैलोरी और चीनी लगभग एक जैसी है। सावर्डो खाने का मतलब यह नहीं कि आप कम कैलोरी ले रहे हैं।
तो इसकी असली खूबी क्या है? लेख तीन बातें बताता है। पहली, लंबा फर्मेंटेशन आटे के ग्लूटेन का कुछ हिस्सा तोड़ देता है, जो उन लोगों के लिए आसान हो सकता है जिन्हें पेट फूलने या ब्रेड पचाने में दिक्कत होती है। दूसरी, प्राकृतिक फर्मेंटेशन फाइटिक एसिड को तोड़ता है, जिससे शरीर आयरन, ज़िंक और मैग्नीशियम जैसे खनिज बेहतर तरीके से सोख पाता है। तीसरी, सावर्डो का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम से मध्यम होता है, इसलिए ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है। हाई-GI सफ़ेद ब्रेड की तरह यह शुगर को तेज़ी से ऊपर-नीचे नहीं करता, जिससे जल्दी भूख लगती है, इसलिए यह पेट भरा रखने में मदद करता है।
मेरी निजी राय में यह नज़रिया सही है। सावर्डो को डाइट फूड मानने के बजाय इसे आंत और ब्लड शुगर के लिए एक नरम विकल्प के रूप में देखना बेहतर है। जो लोग खुद स्टार्टर पालते हैं और अपनी ब्रेड बनाते हैं, उनके लिए ये बातें लंबे फर्मेंटेशन का एक छोटा इनाम हो सकती हैं। मूल लेख में यह भी साफ़ कहा गया है कि ये लेखिका के निजी विचार हैं और उस मीडिया संस्थान की राय नहीं जिसने इसे दोबारा प्रकाशित किया, इसलिए इन्हें थोड़े लचीलेपन से लेना ठीक है।
स्रोत: HK01 (United Daily News से पुनर्प्रकाशित)
प्राकृतिक किण्वन में रुचि रखने वालों के लिए यह दिलचस्प खबर है। स्पेन की दो बड़ी होम डिलीवरी पिज़्ज़ा चेन, टेलेपिज़्ज़ा और डोमिनोज़, ने लगभग एक ही समय पर सोर्डो (खट्टे आटे) पर आधारित विकल्प लॉन्च किए हैं।
लेख के अनुसार, टेलेपिज़्ज़ा ने अपने पूरे रेस्टोरेंट नेटवर्क में सोर्डो आटा पेश किया है। मेन्यू की किसी भी पिज़्ज़ा के साथ लगभग एक यूरो अतिरिक्त देकर इसे चुना जा सकता है, चाहे ऑर्डर ऑनलाइन दिया जाए, रेस्टोरेंट में खाया जाए या डिलीवरी मंगाई जाए। कंपनी हल्के टेक्सचर, गहरे स्वाद, कुरकुरे किनारों और नरम, हवादार अंदरूनी हिस्से का वादा करती है।
डोमिनोज़ ने मैड्रिज़्ज़िमा नाम की पिज़्ज़ा पेश की है, जिसमें सोर्डो को एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल और लंबे आराम वाली दोहरी किण्वन प्रक्रिया के साथ मिलाया गया है, ताकि बेस अधिक हवादार और स्वाद अधिक जटिल हो।
लेख यह भी याद दिलाता है कि सोर्डो गुणवत्ता का प्रतीक क्यों बन गया है। हज़ारों सालों से इस्तेमाल होने वाला प्राकृतिक किण्वन औद्योगिक उत्पादन की तेज़ प्रक्रिया की तुलना में अधिक जटिल सुगंध और हल्की संरचना देता है। लेख के मुताबिक़ डिलीवरी में प्रतिस्पर्धा अब केवल कीमत या गति पर नहीं, बल्कि ग्राहकों की नज़र में उत्पाद की गुणवत्ता पर भी टिकी है।
यह देखना दिलचस्प है कि एक हस्तकला तकनीक बड़े पैमाने पर मार्केटिंग का तर्क बन गई है। यह जानने की उत्सुकता रहेगी कि यह औद्योगिक सोर्डो उस स्टार्टर से कितना मिलता है जिसे कई लोग घर पर जार में रखते हैं। फिर भी, यह संकेत देता है कि लोग धीमे किण्वन की कीमत समझने लगे हैं, जो अच्छी खबर है।
स्रोत: Directo al Paladar