喝茶喝了这么多年,我一直把「茶艺」和「茶道」混着用,直到最近读了一篇讲两者区别的文章,才真正分清楚。原来这一字之差,差的是形与神,也差出了两种完全不同的喝茶境界。
文章里讲得很清楚:茶艺重在「艺」,是看得见、学得会的技艺。从温杯烫盏到悬壶高冲,从盖碗三才到品茗闻香,每一步都能通过系统训练掌握,追求的是审美上的享受。茶道则重在「道」,是借茶修心的哲学,讲究「和敬清寂」「禅茶一味」,追求的是精神层面的提升。简单说,茶艺是形而下的技术,茶道是形而上的法则。
文章引用了茶文化学者王玲在《中国茶文化》里的一句话,我印象特别深:茶艺是茶文化的外在形式,茶道才是精神与本质。她还打了个比方——没有茶道的茶艺就像没有灵魂的躯壳,没有茶艺的茶道是空中楼阁。想想还真是这样。日本茶道虽然极重仪式,核心却是「和敬清寂」四个字;潮汕工夫茶的二十一式背后,也藏着「关公巡城」「韩信点兵」里的平等精神。
我自己慢慢也悟出来了:茶艺如舟,茶道如海,舟无海则无方向,海无舟则难抵达。想提升生活美感的,可以先从学茶艺入手,练练盖碗、控控水温、摆摆茶席;追求精神共鸣的,不妨读读陆羽《茶经》里的「精行俭德」,或者静坐时慢慢体会一杯茶的滋味。
说到底,喝茶的最高境界,是用艺载道、艺道兼修。下次泡茶的时候,不妨也问问自己:今天这杯茶,是艺,是道,还是艺与道的共鸣?
来源:百家号
Все говорят о Великом шёлковом пути, а у Сибири был свой великий маршрут — Чайный путь. И его сердцем была Кяхта, маленький городок на границе с Монголией. Недавно попался большой материал о ней, делюсь главным.
Кяхту основали в 1727 году как пограничный форпост, но очень скоро она стала главными торговыми воротами империи: через неё шла почти вся торговля России с Китаем, и прежде всего — чай. Уже в середине XVIII века здесь проходило 67% товарооборота России с азиатскими странами, а в лучшие годы городок приносил казне 8–9% всех её доходов. По подсчётам Карла Маркса, к середине XIX века в Кяхте продавали 1 миллион 750 тысяч ящиков чая в год.
Почему кяхтинский чай ценили выше английского? Всё дело в сухопутной доставке. Британские корабли везли чай через океан, и в трюмах он нередко подмокал и набирался неприятных запахов. Кяхтинский чай шёл почти целиком по суше — в Европе его хвалили за чистый вкус и красоту заварки, да и стоил он дешевле чая Ост-Индской компании. Существовала даже особая маркировка, чтобы защитить его от подмеси низкосортного английского.
Купцы-кяхтинцы — Трапезниковы, Медведниковы, Баснины, Молчановы, Лушниковы, Сабашниковы, Старцевы и другие — сколотили огромные состояния, но оставили после себя не только особняки и платья от Ворта. На их деньги открывались школы, женская гимназия, реальное училище, первая публичная библиотека и первая забайкальская газета «Кяхтинский листок». Купец Алексей Старцев подарил свой особняк отделению Русского географического общества — так появился Кяхтинский краеведческий музей, старейший музей Сибири.
Закат пришёл в конце XIX века: открытие Суэцкого канала в 1869 году, а затем Транссиб, прошедший мимо Кяхты, увели чай на другие маршруты. Сегодня это скромный пограничный город, но мне нравится мысль, которой заканчивается статья: когда в следующий раз будете заваривать чай, вспомните Кяхту.
Источник: Сибирский. Новостной
चित्र: Пётр Милевский / Wikimedia Commons · Public domain
जहाँ मैचा और ग्रीन टी सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा बटोरते हैं, वहीं सफ़ेद चाय अब तक अपेक्षाकृत गुमनाम रही है। जर्मन टी एंड हर्बल टी एसोसिएशन का मानना है कि यह बदल सकता है, 9 मार्च 2026 की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार।
सफ़ेद चाय चाय के पौधे Camellia sinensis की नई कलियों और पत्तियों से बनती है और लगभग बिना प्रसंस्करण के तैयार होती है। पत्तियों को छायादार, हवादार जगह में 24 से 72 घंटे तक मुरझाने दिया जाता है और फिर धूप में या कम तापमान पर सुखाया जाता है। इससे कलियों का चाँदी जैसा रोएँदार आवरण बना रहता है, और सुगंध हल्की, थोड़ी मीठी से फूलों जैसी होती है। सफ़ेद चाय में केवल 5 से 10 प्रतिशत हल्का किण्वन होता है, इसमें ग्रीन टी से कम टैनिन और कैफ़ीन होता है, और यह कैटेचिन व पॉलीफ़ीनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है।
एसोसिएशन आमतौर पर 70 से 80 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी से बनाने की सलाह देता है। शुरुआती लोगों के लिए पाई मू तान (फूलों जैसी, फ़ुजियान प्रांत की), अधिक तीखी शू मेई, और ख़ास किस्म सिल्वर नीडल्स सुझाई जाती है। एसोसिएशन की क्यरा शापर इस संयमित कोमलता को उन लोगों के लिए आश्चर्य बताती हैं जो आमतौर पर काली या ग्रीन चाय पीते हैं।
मुझे यह विचार अच्छा लगता है कि कुछ चाय पहली चुस्की में नहीं, बल्कि दूसरी में दिल जीतती हैं। जो लोग धीरे-धीरे बारीक सुगंधों से परिचित होना चाहते हैं, उनके लिए यह एक अच्छी शुरुआत है।
स्रोत: Deutscher Tee & Kräutertee Verband
ANTARA ने मध्य जावा के करंगन्यार ज़िले के नगारगोसो में केमुनिंग गाँव के चाय उद्यमी एको वुर्यांतो के बारे में लिखा है। 2012 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी, क्योंकि उन्हें केमुनिंग चाय की संभावनाएँ दिखीं, जो उस समय पर्यटकों में ज़्यादा प्रसिद्ध नहीं थी।
उनकी शुरुआती पूँजी लगभग 80 लाख रुपिया थी, साधारण उपकरणों से काम शुरू हुआ, जिनमें से कुछ उन्होंने खुद बनाए थे। शुरुआती मुनाफ़ा सिर्फ़ लगभग 3 लाख रुपिया प्रति माह था, और हर महीने लगभग 50 किलोग्राम का उत्पादन हमेशा बिक नहीं पाता था। आज उनका कारोबार 26 किसानों के साथ मिलकर लगभग पाँच हेक्टेयर ज़मीन से हर महीने 5 से 6 टन चाय संसाधित करता है, और ताज़ी कोंपलों के लिए कम से कम 5,000 रुपिया प्रति किलोग्राम देता है।
उनके उत्पाद सिर्फ़ साधारण चाय तक सीमित नहीं हैं; हरी, काली, सफ़ेद, चमेली, अदरक, लेमनग्रास, फल, मसाला और मैचा चाय भी बनती हैं। एक "राको" चाय भी है, जिसका स्वाद कॉफ़ी जैसा है और जो उनके अनुसार पुराने कॉफ़ी बागानों की ज़मीन पर उगाई जाती है। मासिक आय 2023 में लगभग 8.5 करोड़ रुपिया से बढ़कर 2026 में 25 से 30 करोड़ रुपिया हो गई, और रीसेलर 235 से बढ़कर लगभग 620 हो गए। सुराबाया की एक प्रदर्शनी में भाग लेने के बाद उनकी मुलाक़ात बोयोलाली के खरीदारों से हुई, जो अब रोज़ लगभग 3,000 उत्पादों का ऑर्डर देते हैं। यह कारोबार इंडोनेशिया बैंक द्वारा समर्थित एक सूक्ष्म और लघु उद्यम है।
मेरे मन में सबसे ज़्यादा यह बात बैठी कि उनके लिए मुनाफ़ा सिर्फ़ उनके अपने लिए नहीं है। ऐसी कहानियाँ याद दिलाती हैं कि एक कप स्थानीय चाय कई किसान परिवारों की रोज़ी-रोटी बन सकती है।
स्रोत: ANTARA News
CNA की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, नानतोउ काउंटी के मिंगजियान टाउनशिप में चाय पत्ती का खरीद मूल्य हाल के निचले स्तर पर आ गया है, जबकि उत्पादन और सामग्री की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे चाय किसान और पूरी आपूर्ति शृंखला दबाव में हैं।
नानतोउ काउंटी की प्रमुख हसू शू-हुआ ने कहा कि उन्होंने किसानों की चिंताएँ कृषि मंत्रालय तक पहुँचाई हैं और केंद्र सरकार से ठोस उपाय माँगे हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने पहले संकेत दिया था कि सब्सिडी का एक हिस्सा किसानों को और एक हिस्सा चाय व्यापारियों को मिलेगा। उन्होंने विधायकों से मंत्रालयों के साथ संवाद में मदद माँगी, और कहा कि काउंटी किसी भी सब्सिडी के साथ सहयोग करेगी और मिंगजियान फ़ार्मर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर विपणन और खरीद पर विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य भूमि चीन के खरीदारों को बिक्री घटी है, और काउंटी अन्य शहरों में नए बिक्री चैनल विकसित कर रही है।
काउंटी प्रमुख पद के एक अन्य उम्मीदवार वेन शिह-चेंग अधिक सब्सिडी की वकालत करते हैं। वे चाहते हैं कि खाद्य और कृषि एजेंसी प्रति कैटी सब्सिडी बढ़ाकर 3 नया ताइवानी डॉलर करे, यानी लगभग 5 डॉलर प्रति किलोग्राम। उनका कहना है कि वे और मिंगजियान टाउनशिप के मेयर केंद्र सरकार के अधिकारियों के सामने यह मुद्दा कई बार उठा चुके हैं।
इस खबर ने मुझे सोचने पर मजबूर किया कि चाय पीते समय हमें बस चाय का रंग और सुगंध दिखती है, लेकिन उसके पीछे कीमतों के उतार-चढ़ाव को लेकर किसानों की चिंता होती है। अंतिम सब्सिडी जैसी भी हो, मेरी उम्मीद है कि चाय किसानों को उचित आय मिले, ताकि ताइवानी चाय अपनी गुणवत्ता बनाए रख सके।
स्रोत: CNA
मौसम ठंडा होने के साथ, हैम्पशायर स्थित Ahmad Tea शरद ऋतु के मिश्रणों का एक सेट बढ़ावा दे रही है: Chai Spice, Cinnamon Haze, Vanilla, Cinnamon & Apple, Blackcurrant Burst और Rooibos & Cinnamon। शीर्षक पाँच चायों की बात करता है, पर सूची में वास्तव में छह नाम हैं।
तर्क यह है कि ठंडे मौसम में गर्म मसाले, पके फल और मीठी सुगंध ज़्यादा समृद्ध और संतोषजनक लगते हैं। कंपनी ज़ोर देती है कि जोड़े गए स्वाद चाय पर हावी होने के बजाय उसे पूरक होने चाहिए, ताकि अच्छी केन्याई और अन्य पूर्वी अफ़्रीकी काली चाय का ताज़ा चरित्र बना रहे।
खाने के साथ जोड़ी के सुझाव भी हैं। मसालेदार चाय दलिया, भुने फलों और केक के साथ अच्छी लगती है, वैनिला पुडिंग और मीठी बेकरी के साथ, फलों वाले मिश्रण भारी खाने का स्वाद हल्का करते हैं, और मज़बूत काली चाय भरपेट नाश्ते के साथ जँचती है। Rooibos & Cinnamon में कैफ़ीन नहीं है, इसलिए यह शाम के लिए अच्छा विकल्प है।
लेख यह भी बताता है कि सुगंध और स्वाद का रिश्ता याद और मौसम से है, और शायद इसीलिए अक्टूबर में दालचीनी, वैनिला और सेब इतने सुकून देने वाले लगते हैं। स्वाद वाले मिश्रण हर किसी के लिए गंभीर चाय नहीं होते, लेकिन संतुलन वाली बात मुझे पसंद आई। मुझे जानने की उत्सुकता है कि शामें गहराने पर यहाँ के चाय प्रेमी इन जोड़ियों में से कौन-सी चुनते हैं।
स्रोत: Tea & Coffee Trade Journal
Lidl GB ने Way To Go! Tea लॉन्च की है, जिसे कंपनी ब्रिटेन की पहली ऐसी चाय बताती है जो केन्या के चाय किसानों की सम्मानजनक आय (living income) के अंतर को सीधे पाटने के लिए बनाई गई है। यह सितंबर के अंत में स्टोर्स में पहुँची, जो Fairtrade Fortnight के साथ मेल खाती है।
विचार सीधा है। किसानों को अब भी Fairtrade का न्यूनतम मूल्य और Fairtrade प्रीमियम मिलता है, और उसके ऊपर हर किलोग्राम पर केन्या के केरिचो के छोटे उत्पादकों को अतिरिक्त राशि जाती है। Lidl ने Fairtrade के साथ मिलकर इस चाय के लिए एक Living Income Reference Price तय किया। Fairtrade के अनुसार, अभी केन्या के पाँच में से केवल एक चाय किसान हर महीने इतना कमाता है कि ज़रूरी खर्च पूरे कर सके।
उत्पाद एक सिंगल ओरिजिन केन्याई चाय है, जो 80 बैग के लिए 1.99 पाउंड की है। बैग 100% पौध-आधारित रेशों से बने हैं, जो बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्ट करने योग्य हैं। Lidl का यह भी कहना है कि उसकी अपनी ब्रांड की ब्लैक, ग्रीन और रुइबोस चाय अब Rainforest Alliance या Fairtrade से प्रमाणित है, और वह केन्याई चाय पर मानवाधिकार प्रभाव आकलन करने वाला ब्रिटेन का पहला रिटेलर था।
एक सस्ती चाय की प्याली कितने हाथों से होकर गुज़रती है, यह अक्सर भुला दिया जाता है। मुझे यह अच्छा लगा कि यह लॉन्च उचित मज़दूरी के सवाल को सिर्फ़ पैकेट पर लोगो के बजाय एक ठोस आँकड़ा देता है।
स्रोत: Tea & Coffee Trade Journal
नानतोउ विश्व चाय मेला 3 अक्टूबर को शुरू हुआ और 11 अक्टूबर तक चलेगा, कुल नौ दिन। कृषि मंत्रालय के कृषि-खाद्य प्रशासन ने परिसर में "जैविक चाय विषयक मंडप" बनाया है, ताकि आगंतुक चाय पीते हुए ताइवान के भू-वातावरण के बारे में जान सकें।
प्रशासन 2019 से ताइवान की जैविक चाय के ब्रांड निर्माण का समर्थन कर रहा है, और 2022 से उसने त्ज़ु ची ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट फ़ाउंडेशन को पूरे द्वीप के जैविक चाय किसानों और ब्रांडों को "ऑर्गेनिक आइलैंड टी" के नाम से एक मंच पर लाने का काम सौंपा है। इस साल 16 काउंटी और शहरों के 106 जैविक चाय किसान प्रदर्शनी में हैं, जो ताइवान के सभी जैविक चाय किसानों के एक-तिहाई से भी ज़्यादा हैं। चाय की किस्मों में हरी, पीली, सफ़ेद, बाओझोंग, उलोंग, ओरिएंटल ब्यूटी, लाल उलोंग और काली चाय शामिल हैं।
इस वर्ष का विषय "प्रकाश-संश्लेषण अध्ययन" है, जो चाय के प्रकाश-संश्लेषण और चाय व पर्यावरण के सह-अस्तित्व के संबंध को देखता है, और स्थानिक प्रदर्शनियों, चखने और इंटरैक्टिव अनुभवों को जोड़ता है। मंडप में "आइलैंड टी शोकेस" पाठ्यक्रम 106 भाग लेने वाले ब्रांडों का परिचय देता है, और "प्रकाश-संश्लेषण अध्ययन: चाय पर अंतर-विषयक प्रयोग" सैलून फ़ोरम होता है। हर दिन 28 चाय किसान समूह मौके पर चाय की मेजों पर खुद चाय परोसते हैं। मंत्रालय के चाय और पेय फ़सल अनुसंधान संस्थान ने "ताइवान चाय संस्कृति संस्थान" बनाया है, जो पारंपरिक चाय कला, एआई से चाय चयन और चाय की सुगंध के अनुभव को जोड़ता है।
मुझे सबसे दिलचस्प यह लगा कि चाय किसान खुद मौके पर चाय परोसते हैं। जो लोग चाय उगाते हैं, उनसे सीधे सुनना प्रदर्शनी को सिर्फ़ देखने से कहीं ज़्यादा असर डालता है। अगर नानतोउ जाने का मौका मिले, तो ताइवान की चाय के विविध स्वादों को जानने का यह अच्छा अवसर है।
स्रोत: CNA
सरकारी चाय उपक्रम ÇAYKUR (Çay İşletmeleri Genel Müdürlüğü) ने 28 अगस्त 2026 की अपनी सूचना में बताया है कि तीसरी फ़्लश की ताज़ी चाय पत्ती की खरीद अभियान 1 सितंबर को शुरू होगा।
सूचना के अनुसार, 8 जुलाई को शुरू हुई दूसरी फ़्लश की खरीद 28 अगस्त को समाप्त हो गई। कंपनी का कहना है कि देर से पकने वाले इलाकों को ध्यान में रखते हुए उसने दूसरी फ़्लश की खरीद का कार्यक्रम लंबी अवधि में फैलाया। उसने उत्पादकों से तीसरी फ़्लश में भी उतनी ही सावधानी बरतने को कहा है। साथ ही, कंपनी ने कहा है कि वह पूरे तुड़ाई काल में सूचनाएं जारी करती रहेगी, और संबंधित पक्षों को उन पर नज़र रखनी चाहिए।
पाठ में यह उम्मीद भी जताई गई है कि यदि तीसरी फ़्लश अच्छी रही, तो 2026 सचमुच लाभदायक वर्ष साबित होगा। पाठ में कीमतों की कोई जानकारी नहीं है।
चाय पीने वाले के रूप में मुझे यह जानकर अच्छा लगता है कि हर प्याली के पीछे ऐसा कार्यक्रम और इतनी मेहनत है। काला सागर की बारिश वाली ढलानों पर साल में कई बार तुड़ाई होने से चाय हमारे लिए रोज़ की आदत से आगे बढ़कर एक संस्कृति बन जाती है। आप चाय किस केतली में, कितनी गाढ़ी बनाकर पीना पसंद करते हैं?
स्रोत: ÇAYKUR
मैचा केवल पिसी हुई हरी चाय की पत्ती नहीं है। ANTARA की एक समीक्षा के अनुसार, यह जापान की पारंपरिक खेती और प्रसंस्करण की विधि है, जिसमें बहुत सटीकता चाहिए, और हर चरण उसके रंग, सुगंध और प्राकृतिक उमामी स्वाद को प्रभावित करता है।
पहला चरण छायांकन है। कटाई से लगभग तीन से चार सप्ताह पहले चाय के पौधों को जाली या पुआल की चटाई (कान्सो) से ढक दिया जाता है, जो सूरज की 70 से 90 प्रतिशत रोशनी रोक लेती है। कम रोशनी में क्लोरोफिल बढ़ता है, जिससे हरा रंग गहरा होता है, और L-थिएनिन की मात्रा भी बढ़ जाती है। दूसरा चरण तुड़ाई है: पहली तुड़ाई (शिनचा) की सबसे कोमल कोंपलें तोड़ी जाती हैं, क्योंकि उनमें पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट सबसे अधिक होते हैं।
तीसरा चरण भाप देना है: तोड़ने के कुछ घंटों के भीतर पत्तियों को 15 से 20 सेकंड तक भाप दी जाती है, ताकि एंजाइम से होने वाला ऑक्सीकरण रुक जाए और रंग बना रहे। चौथा चरण बिना लपेटे पत्तियों को सुखाना और फिर डंठल व मोटे रेशे हटाने के लिए छँटाई करना है; इससे जो बनता है उसे टेंचा कहते हैं। पाँचवाँ चरण टेंचा को ग्रेनाइट की चक्की (इशी-उसु) पर धीरे-धीरे पीसना है, जो प्रति घंटे केवल 30 से 40 ग्राम देती है, ताकि घर्षण की गर्मी से सुगंध खराब न हो।
मुझे यह बात अच्छी लगी कि लेख बताता है कि अनुष्ठान वाला मैचा खाना पकाने के मैचा से अलग क्यों होता है: यह सब छायांकन की सावधानी और टेंचा की शुद्धता पर निर्भर करता है। प्रक्रिया जानने के बाद मैचा की ऊँची कीमत भी ज़्यादा समझ में आती है।
स्रोत: ANTARA News
शिज़ुओका टी कॉमर्शियल इंडस्ट्री कोऑपरेटिव ने 8 अक्टूबर को घोषणा की कि वह 31 अक्टूबर को «चैलोवीन» आयोजित करेगा। यह चाय और हैलोवीन को मिलाने वाला आयोजन है, जो शिज़ुओका शहर की केयाकी स्ट्रीट पर होगा।
आयोजकों का कहना है कि उन्होंने सड़क में रौनक लाने के लिए कई कार्यक्रम तैयार किए हैं, और चाय के स्टॉल भी बड़ी संख्या में होंगे। घोषणा पेज पर विशेष कार्यक्रम और समय का उल्लेख नहीं है; विवरण मात्सुज़ाकाया शिज़ुओका स्टोर के इवेंट पेज पर बताए गए हैं। सहकारी समिति की सूचना के अनुसार, उसी दिन चैलोवीन का एक म्यूज़िक वीडियो भी जारी हुआ।
संपर्क: शिज़ुओका टी कॉमर्शियल इंडस्ट्री कोऑपरेटिव (शिज़ुओका टी हॉल की पहली मंजिल, फ़ोन 054-271-1955)।
चाय आमतौर पर शांत छवि जगाती है, इसलिए हैलोवीन की पोशाकों के साथ उसका आनंद लेना मुझे नया लगा। मुझे लगता है कि यह युवाओं और परिवारों के लिए चाय से सहज रूप से परिचित होने का अच्छा तरीका हो सकता है, चाय के गढ़ शिज़ुओका की एक सूझबूझ भरी पहल। विवरण आने पर मैं इस पर ज़रूर नज़र रखना चाहूँगा।
स्रोत: शिज़ुओका टी कॉमर्शियल इंडस्ट्री कोऑपरेटिव
इतो एन ने 5 अक्टूबर को अपने मैचा पेय ब्रांड «matcha LOVE» के दो नए उत्पाद पूरे देश में उतारे हैं: «मैचा कॉफ़ी लाटे» और «मैचा मॉन्ट ब्लां लाटे»।
मैचा कॉफ़ी लाटे 280 मिलीलीटर की बोतलनुमा कैन में आता है और उसकी कीमत 270 येन (कर सहित) है। इसमें 100% घरेलू मैचा और कॉफ़ी का इस्तेमाल हुआ है, और यह चर्चित «डर्टी मैचा» से प्रेरित है, लेकिन इसमें एस्प्रेसो नहीं है। मैचा मॉन्ट ब्लां लाटे 170 ग्राम की चौड़े मुंह वाली कैन में आता है और उसकी कीमत 194 येन (कर सहित) है। यह भी 100% घरेलू मैचा से बना है, और कहा जाता है कि इसका स्वाद भुनी हुई चेस्टनट जैसा मीठा है। दोनों को गर्म या ठंडा, किसी भी तरह पिया जा सकता है।
इसके अलावा मार्च में आए मैचा बेरी लाटे और मैचा बादाम लाटे को भी नया रूप दिया गया है, ताकि वे गर्म और ठंडे दोनों रूपों में परोसे जा सकें। ये 5 अक्टूबर से ही 270 येन (कर सहित) में बिक रहे हैं। niko and ... COFFEE के साथ मिलकर बना एक सहयोगी उत्पाद भी है, जो 10 से 12 अक्टूबर तक शिनागावा में «UNI9UE PARK MARCHE'26» में केवल तीन दिनों के लिए मिलेगा; वहां मैचा कॉफ़ी स्मूदी आदि 680 येन (कर सहित) में मिलेगी।
ये उत्पाद चाय समारोह की चाय से कुछ दूर हैं, लेकिन मुझे दिलचस्प लगता है कि मैचा इतने रोज़मर्रा के पेय के रूप में कैसे फैल गया। मुझे लगता है कि इस शरद ऋतु में कई लोग इसका गर्म रूप ज़रूर आज़माना चाहेंगे।
स्रोत: इतो एन