Kålpudding har ett oförtjänt tråkigt rykte. Många minns den som grå och vattnig från skolmatsalen, men gjord från grunden är den söt, gyllenbrun och mustig. Och den är billig: ett kilo vitkål kostar nästan ingenting och räcker långt.
Hela hemligheten sitter i kålen, innan den ens möter färsen. Rå vitkål innehåller mycket vatten och har en skarp, nästan besk ton. Lägger man den direkt i färsen blir puddingen blöt. Fräs i stället ett kilo fint strimlad kål i smör i 20–25 minuter, tills vätskan kokat bort och kanterna fått gyllene fläckar. Ta en stor gryta, inte en stekpanna: ett kilo strimlad kål är nästan fyra liter innan den sjunker ihop, och i en vanlig panna ångar den bara.
Den mörka sirapen är till för att bryna kålen, inte för att göra rätten söt. Tillsätt den först när kålen redan mjuknat, annars bränner den fast. Sötman dämpar också beskan.
Grunden i receptet: 500 g blandfärs, en gul lök, ett ägg, 1 dl ströbröd som fått svälla i 1 dl mjölk, salt, torkad mejram och peppar. Vill man ha mer tuggmotstånd kan ströbröd och mjölk bytas mot två deciliter kokt ris; båda varianterna finns i klassiska recept.
Låt kålen svalna till rumstemperatur innan den blandas med den råa färsen, pensla ytan med lite sirap och grädda på 175 grader i 45–60 minuter. Eftersom det är malet kött ska mitten hålla 70 grader, så en stektermometer är det enda säkra sättet. Låt den vila tio minuter så att bitarna håller ihop.
Tillbehören är halva rätten: kokt potatis, en enkel sås på grädde, lite vetemjöl och en skvätt soja, och framför allt rårörda lingon, vars syra bryter av mot sirapens sötma. Det bästa av allt är att kålpudding blir lika god uppvärmd, så laga gärna dubbelt och frys in portionsbitar.
Källa: Metro Mode
एक पाक कला की शौकीन और दक्षिणी इटली की रहने वाली होने के नाते, मेरा हमेशा मानना रहा है कि सबसे खूबसूरत व्यंजन वे होते हैं जो कभी भी चलन से बाहर नहीं होते। 2025 में, इतालवी व्यंजन को यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी गई, और इसने मुझे बहुत खुशी दी: यह ज्ञान, तकनीकों और सामाजिकता के प्रति एक सम्मान है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं।
मैंने अपनी ब्लॉग पर उन बेहतरीन क्लासिक व्यंजनों को एकत्र किया है जिन्हें आपको कम से कम एक बार ज़रूर आज़माना चाहिए, जो उत्तरी इटली से लेकर दक्षिणी इटली तक फैले हैं। इसमें उन सॉस और ग्रेवी शामिल हैं जो घर जैसा स्वाद देती हैं: बोलोगनीज़ रैगू, जो रविवार को धीमी आंच पर पकाया जाता है, अमैट्रिसियाना, क्रीमी कार्बनारा (बिना क्रीम के), जेनोवेस पेस्टो और पुट्टनेस्का, जो साधारण और विशिष्ट सामग्री से बनाया जाता है।
इसके बाद ताज़े पास्ता और ग्नोची हैं, जो मेरे लिए प्रेम का प्रतीक हैं: अंडे से बने लासाग्ने, आलू से बने ग्नोची, कैवेटेली, सार्डिनियाई कुलुरियोनेस और मेरे सिसिली के "मैकरोनी अल फेर्रेतो"। प्रत्येक क्षेत्र अपनी विशिष्ट रेसिपी को संजोता है, जो अक्सर साधारण भोजन से उत्पन्न होती हैं और जिसमें कुछ भी बर्बाद नहीं किया जाता है, जैसे कि शोरबा में पसे हुए पासटेली या सार्डिन और डिल के साथ पास्ता।
सबसे अच्छी बात यह है कि आपको शेफ होने की ज़रूरत नहीं है: केवल साधारण सामग्री, थोड़ी सी धैर्य और वह सुगंध पर्याप्त है जो पूरे घर को भर देती है। मेरे लिए, इन व्यंजनों को बनाना, मेरी दादी के साथ रसोई में बिताए बचपन की यादों को ताज़ा करने जैसा है।
स्रोत: GialloZafferano
अब जब पतझड़ आ गया है, दुकानों में कद्दू फिर हर जगह दिख रहा है। Leuke Recepten की सैंड्रा वाटरशूट ने 16 सितंबर 2026 को अपनी 14 पसंदीदा कद्दू की रेसिपी इकट्ठी कीं, और मुझे यह सूची विचार पाने का अच्छा स्रोत लगी। वे कद्दू को बहुमुखी, पौष्टिक और लंबे समय तक टिकने वाला बताती हैं।
सूची की शुरुआत क्लासिक व्यंजनों से होती है: कद्दू का सूप और बटरनट स्क्वैश, गरम मसाला, नारियल के दूध और दाल वाला करी। फिर यह और विविध हो जाती है: भुने कद्दू का रिसोट्टो, जिसका कुछ हिस्सा पीसकर मिलाया जाता है; पालक, शिमला मिर्च और रिकोटा वाली कद्दू लसग्ना; और भुने कद्दू, अखरोट व सेज वाला पास्ता। मशरूम और चिकन से भरा ओवन में पका कद्दू, पालक-पेकन-बकरी के पनीर वाला क्विश, और पफ पेस्ट्री पर कद्दू व बकरी पनीर वाली शीट पिज़्ज़ा भी स्वादिष्ट लगती हैं। कुछ अनोखा चाहिए तो कद्दू वाली शकशुका और सेज व बकरी पनीर वाला मैश भी है।
किस्मों के बारे में सुझाव भी काम के हैं। बटरनट क्रीमी, नटी स्वाद वाला और आसानी से छिलने वाला है, और यह सैंड्रा की पसंदीदा किस्म है। हक्काइडो का छिलका खाने योग्य होता है और यह थोड़ा मीठा होता है, हरा काबोचा ठोस होता है और करी व स्टू में अच्छा लगता है, और बड़ा नारंगी हैलोवीन कद्दू खाने योग्य है पर इसका स्वाद हल्का होता है।
मेल के लिए वे बकरी पनीर और फ़ेटा जैसे मुलायम चीज़, दालचीनी, जीरा, जायफल, सेज, अदरक, तेज पत्ता और थाइम जैसे मसाले और जड़ी-बूटियाँ, मेवे व बीज, और नींबू, सेब या दही जैसी ताज़ी चीज़ें सुझाती हैं। उनकी अपनी सलाह: कद्दू के टुकड़े फ्रीज़र में रखें, ताकि वे सूप, स्टू, रिसोट्टो और स्टर-फ्राई के लिए तैयार रहें। मौसम समेटने के लिए अच्छी सूची।
स्रोत: Leuke Recepten
शरद ऋतु आते ही मुझे चेस्टनट खरीदने का मन करता है, लेकिन एक साथ बहुत ज़्यादा आ जाएँ तो उन्हें खत्म करना मुश्किल होता है। Delish Kitchen पर एक लेख आया है जो चेस्टनट को फ्रिज और फ्रीज़र में रखने और तैयार करने के तरीके बताता है, इसलिए मैं मुख्य बातें लिख लेना चाहती हूँ। लेख को एक पोषण विशेषज्ञ ने जाँचा है और इसकी तारीख 6 अक्टूबर 2026 है।
मूल सिद्धांत सरल है: अगर कुछ दिनों में इस्तेमाल करना है तो फ्रिज में, और जल्दी खत्म नहीं कर पाएँगे तो फ्रीज़र में रखें। दोनों ही स्थितियों में रखने से पहले छेद वाले चेस्टनट निकाल दें और सतह को अच्छी तरह सुखा लें। छिलके पर छेद या छोटे धब्बे वाले चेस्टनट में कीड़े हो सकते हैं, और जो पानी में तैरते हैं वे भी खराब हो सकते हैं, इसलिए उन्हें फेंक देना बेहतर है।
फ्रिज वाले तरीके में तीन चरण हैं। पहला, जाँचें कि उनमें छेद न हो। दूसरा, बर्तन में खूब पानी उबालें, चेस्टनट डालें, गैस बंद करें और एक मिनट रखकर पानी निथार लें। तीसरा, उन्हें किचन टिश्यू पर तब तक रखें जब तक वे ठंडे न हो जाएँ और नमी न सूख जाए, फिर बचा हुआ पानी पोंछें, अखबार में लपेटें और फ्रिज में रख दें। लेख में फ्रिज में रखने की कोई निश्चित अवधि नहीं बताई गई है, बस जल्द से जल्द खाने की सलाह दी गई है।
फ्रीज़र के लिए पहले बाहरी छिलका और अंदर की पतली झिल्ली हटा दें। कच्चे जमाने हों तो छीले हुए चेस्टनट को लगभग 5 मिनट पानी में भिगोएँ, छानें, सुखाएँ, फ्रीज़र बैग में एक परत में रखें और हवा निकाल दें। उबालने के बाद जमाने हों तो उन्हें इतने पानी में, जो उन्हें ढक दे, मध्यम आँच पर लगभग एक घंटा उबालें, फिर ठंडा करके छीलें और उसी तरह पैक करें। लेख चेतावनी देता है कि उबले चेस्टनट को खाने से पहले दोबारा गरम करना ज़रूरी है, और भंडारण की अवधि लगभग एक महीना बताता है। लंबे समय तक रखने के लिए चीनी या नमक छिड़कने का तरीका भी बताया गया है, ताकि फ्रीज़र बर्न न हो।
एक अतिरिक्त सुझाव: अगर चेस्टनट छिलके सहित जमाए जाएँ और फिर थोड़ी देर गरम पानी में डुबोए जाएँ, तो बाहरी छिलका नरम हो जाता है और अंदर की झिल्ली आसानी से निकल आती है। छीलने के बाद चेस्टनट को तुरंत पानी में डाल दें ताकि उनका कसैलापन निकल जाए। छीलना हमेशा मुझे सबसे मुश्किल लगा है, इसलिए यह तरकीब मैं याद रखना चाहती हूँ।
स्रोत: Delish Kitchen
सितंबर 2026 में Nefis Yemek Tarifleri पर अपडेट हुई बैंगन गोज़लेमे की एक रेसिपी ने मेरा ध्यान खींचा। इसे mutfaktutkunu0 नाम की एक यूज़र ने शेयर किया है। यह 4 से 6 लोगों के लिए है, इसमें लगभग 35 मिनट की तैयारी और 25 मिनट पकाने का समय लगता है, और यह सैच पर बनती है, जो तुर्की का उभरा हुआ तवा है।
भरावन के लिए 3 बड़े बैंगन, 1 बड़ा प्याज़, लहसुन की 1 कली, 3 हरी शिमला मिर्च और 2 कापिया मिर्च चाहिए। आधे कप जैतून के तेल में प्याज़, लहसुन और मिर्चें भूनी जाती हैं, फिर कटे हुए बैंगन डालकर ढककर नरम होने तक पकाए जाते हैं। नमक, पेपरिका, चिली फ़्लेक्स और काली मिर्च से स्वाद बनाकर भरावन को चूल्हे से उतारकर अलग बर्तन में ठंडा होने दिया जाता है। मुझे यह बात ज़रूरी लगती है: गरम भरावन बेलते समय आटे को फाड़ देती है, इसलिए उसे ठंडा करना ही असली तरकीब है।
आटे के लिए 4 कप मैदा, 1 छोटा चम्मच नमक और उतना गुनगुना पानी चाहिए जिससे मध्यम कड़ाई का आटा बने। आटा 15 मिनट आराम करता है, फिर संतरे जितने टुकड़ों में बाँटा जाता है। हर टुकड़े को पतला बेलकर बीच में भरावन रखी जाती है, किनारे गीले करके बंद किए जाते हैं और ज़्यादा आटा काट दिया जाता है। गोज़लेमे को सैच पर दोनों तरफ से सेंककर मक्खन लगाकर परोसा जाता है।
सामग्री की सूची छोटी है, लेकिन नतीजा घर की मेज़ के असली क्लासिक जैसा दिखता है। बैंगन के मौसम के आख़िर में इसे आज़माना अच्छा विचार है, और मुझे आख़िर में मक्खन वाला स्पर्श खास तौर पर पसंद आया।
स्रोत: Nefis Yemek Tarifleri
तलना एक जानी-पहचानी तकनीक है, फिर भी हर बार अच्छा नतीजा नहीं आता। मैंने VnExpress का एक लेख पढ़ा। यह Nhật Minh का तैयार किया हुआ सारांश है, जो ABC.net.au की एक खबर पर आधारित है, और इसमें ऑस्ट्रेलिया के Le Cordon Bleu कुकिंग स्कूल के तकनीकी निदेशक Tom Milligan की राय है। इसमें कई ऐसी बातें थीं जिन्हें नोट करना चाहिए।
सबसे पहले तलने के चार तरीके। पैन-फ्राई में थोड़ा तेल लगता है और खाने को पलटकर दोनों तरफ़ से बराबर पकाया जाता है; यह स्टेक, चिकन ब्रेस्ट और सॉसेज के लिए ठीक है। स्टर-फ्राई में लगातार चलाते रहना होता है, आमतौर पर 5 से 10 मिनट, और ज़्यादा देर पकाने से सामग्री गल जाती है। शैलो फ्राइंग में तेल सिर्फ़ खाने के तले को ढकता है और ब्रेड-क्रम्ब वाली चीज़ों पर कुरकुरी परत देता है। डीप फ्राइंग में खाना पूरी तरह गरम तेल में डूबा होता है और यह बैटर वाली चीज़ों और फ्रेंच फ्राइज़ के लिए अच्छा है।
फिर पाँच मुख्य सुझाव। पहला, तेल डालने से पहले कड़ाही गरम करें और सामग्री तभी डालें जब तेल गरम हो जाए, वरना खाना तेल सोख लेता है और नरम पड़ जाता है। दूसरा, एक साथ बहुत ज़्यादा न डालें, क्योंकि कड़ाही का तापमान गिर जाता है और निकली हुई नमी खाने को तलने की बजाय भाप में पका देती है। तीसरा, जड़ी-बूटियाँ, प्याज़ या लहसुन जैसी खुशबूदार चीज़ें आखिरी में डालें, जब व्यंजन लगभग तैयार हो, ताकि वे जलें नहीं। चौथा, बची हुई गर्मी का फ़ायदा उठाएँ। खाना लगभग पक जाए तो कड़ाही चूल्हे से उतार दें और बची हुई गर्मी को उसे पूरा करने दें। पैन की डिशेज़ में आखिर में थोड़ा नींबू का रस अच्छा लगता है, और मांस को परोसने से पहले कम से कम 2 से 3 मिनट कड़ाही से बाहर आराम करने दें। पाँचवाँ, रंग और खुशबू पर ध्यान दें। अच्छी तरह तला हुआ खाना तीन रंगों में दिखता है: हल्का सुनहरा, गहरा सुनहरा, और जहाँ वह कड़ाही को सबसे ज़्यादा छूता है वहाँ गहरा भूरा; और अखरोट जैसी खुशबू बताती है कि वांछित सुनहरापन आ गया है।
लेख में तेल का सटीक तापमान नहीं बताया गया, इसलिए मैं जैसा सुझाव है वैसे रंग और खुशबू को पैमाना मानूँगी। सबसे ज़्यादा जो बात याद रही वह है धैर्य: कड़ाही को अच्छी तरह गरम करना और खाना डालने की जल्दबाज़ी न करना।
स्रोत: VnExpress
Smitten Kitchen की डेब पर्लमैन अपनी नई रेसिपी की शुरुआत इस शिकायत से करती हैं कि सितंबर की शुरुआत में ही कद्दू के मसाले और हैलोवीन की सजावट दिखने लगती है, जब बाहर अभी भी गर्मी होती है। उनका जवाब है कि गर्मियों के टमाटरों को जितना हो सके उतना लंबे समय तक थामे रखा जाए, और इसका नतीजा एक टमाटर रिसोट्टो है, जो मुझे सिर्फ़ पढ़ने भर से आकर्षक लगा।
यह विचार उनके चावल भरे टमाटरों से आया। वे चाहती थीं कि चावल की भरावन अपने आप में एक व्यंजन बने, इसलिए उन्होंने लगभग 900 ग्राम पके बीफ़स्टेक टमाटरों को कद्दूकस करके गूदा बनाया और उसी पर प्याज़, लहसुन और सफ़ेद वाइन के साथ रिसोट्टो बनाया। यह शोरबे की जगह पानी में पकता है, इसे लगातार हिलाने की ज़रूरत नहीं होती, और इसमें बहुत सारा मक्खन या पनीर नहीं डाला जाता।
तरीका सीधा है। वे कटे हुए लाल प्याज़ को ज़ैतून के तेल में गहरे सुनहरे और कुरकुरे होने तक तलती हैं, आधा किचन टिशू पर निकाल लेती हैं, और बाकी प्याज़ के साथ बर्तन में लहसुन भूनती हैं। फिर एक कप आर्बोरियो, कार्नारोली या सुशी चावल को भूनकर लगभग एक-तिहाई कप वाइन से डीग्लेज़ करती हैं, टमाटर का गूदा और लगभग दो कप पानी डालती हैं। ढका हुआ बर्तन 175°C (350°F) पर 25 से 30 मिनट ओवन में जाता है। आख़िर में कुछ मिनट हिलाकर इसे क्रीमी बनाया जाता है, मक्खन या ज़ैतून का तेल मिलाया जाता है, और परमेसन, तोड़ी हुई तुलसी और बचाकर रखे गए प्याज़ों से सजाया जाता है, जिन्हें वे बेकन या प्रोसियूटो के कुरकुरे विकल्प के रूप में पेश करती हैं।
यह चार लोगों के लिए है और लगभग 50 मिनट लेती है। उनके नोट्स के अनुसार कद्दूकस की जगह फ़ूड मिल काम आ सकती है, और मक्खन व पनीर हटाने पर यह वेगन हो जाता है। मुझे सबसे ज़्यादा यह पसंद है कि हिलाने का काम ओवन संभाल ले, जिससे भरी शाम में पकाने वाले को समय मिल जाता है।
स्रोत: Smitten Kitchen
पतझड़ आ गया है और कद्दू फिर से मेरी खरीदारी की सूची में लौट आया है। आज Directo al Paladar की एक रेसिपी पर मेरी नज़र गई, जिसमें एक पारंपरिक सामग्री बदली गई है। लेखिका लिलियाना फ़ुक्स बताती हैं कि उनके पसंदीदा कद्दू के क्रीम सूप में अब आलू नहीं होता। उसकी जगह वे एक ऐसी सब्ज़ी इस्तेमाल करती हैं जो स्पेन में अब भी कम जानी जाती है: ओलकोल (कोहलरबी)।
ओलकोल, जिसे गांठगोभी भी कहते हैं, क्रूसिफेरस परिवार की सब्ज़ी है, यानी उसी परिवार की जिसमें फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रोकली आते हैं। कद्दू की तरह यह भी शरद ऋतु में सबसे अच्छा होता है, इसलिए दोनों को एक साथ पकाना मौसम के हिसाब से ठीक है। लेख के अनुसार इसमें आलू से कम कार्बोहाइड्रेट होते हैं, यह हल्का होता है, और इसमें विटामिन C, खनिज और फाइबर अधिक होते हैं।
लेख में जिन सामग्रियों का ज़िक्र है वे हैं कद्दू, ओलकोल, प्याज़ या गंदना, और चाहें तो अदरक। स्वाद के अनुसार धनिया, जायफल या लहसुन जैसे दूसरे मसाले भी डाले जा सकते हैं। लेख में मात्राएँ या विस्तृत चरण नहीं दिए गए हैं, इसलिए हर कोई अपने तरीके से इसे ढाल सकता है। जो साफ है वह यह कि यह सूप पेट भरने वाला, आरामदेह और हल्का है, और स्टार्टर के रूप में भी अच्छा है और रात के खाने के रूप में भी।
परोसने के लिए लेखिका अपने संस्करण में डेयरी उत्पाद नहीं डालतीं, पर कुछ विकल्प सुझाती हैं: लिक्विड क्रीम, सादा दही, ताज़ा पनीर या बकरी का पनीर। वे इसके साथ कुछ कुरकुरा परोसने की भी सलाह देती हैं, जैसे क्रूटॉन या बीज वाले क्रैकर, ताकि बनावट में अंतर आए।
मुझे बाज़ार में अक्सर अनदेखे रहने वाले मौसमी उत्पादों को इस्तेमाल करने का विचार अच्छा लगता है। अगली बार जब मुझे सब्ज़ी वाले के पास ओलकोल दिखेगा, तो मैं शायद एक घर ले जाकर यह मेल आज़माऊँगा।
स्रोत: Directo al Paladar
कई लोग शिकायत करते हैं कि मुर्गी चाहे जितने मसाले डालें, फीकी लगती है। मैंने Al Jazeera Net पर मोहम्मद सलाह का एक लेख पढ़ा, जो इसके कारण समझाता है और छह व्यावहारिक कदम सुझाता है। यहाँ उसका सार है।
लेख बताता है कि बिना हड्डी और बिना त्वचा वाला चिकन ब्रेस्ट कीमत ज़्यादा होने के बावजूद दुनिया में सबसे ज़्यादा माँग वाला हिस्सा है। इसका कारण 1980 के दशक का वह मार्केटिंग अभियान है जिसने इसे स्वस्थ और वसा-रहित विकल्प के रूप में पेश किया। इसका गहरा कारण गहन पशुपालन है। आधुनिक नस्लों को तंग जगह में पाला जाता है और ऐसा चारा दिया जाता है जो कुछ हफ़्तों में अधिकतम वृद्धि के लिए बना है। इससे मांसपेशियों के बीच की वह चर्बी घटती है जो स्वाद का बड़ा हिस्सा ले जाती है, और पानी की मात्रा बढ़ जाती है। मांस पानीदार हो जाता है और पकाने पर बहुत सारा पानी छोड़ता है।
लेख जाँघ, पंख और ड्रमस्टिक की सलाह देता है, जो सस्ते होते हैं, ज़्यादा स्वादिष्ट होते हैं और किसी भी पकाने के तरीके में रसीले रहते हैं। छह कदम ये हैं। पहला, पारंपरिक तरीके से पाली गई मुर्गी चुनें, आदर्श रूप से खुले में पली, और टुकड़ों को हड्डी व त्वचा के साथ पकाएँ। दूसरा, पहले से नमक, काली मिर्च, लहसुन, स्मोक्ड पेपरिका, अदरक, दही, जैतून का तेल, नींबू का रस और थाइम से भरपूर मसाला लगाएँ। तीसरा, फ्रिज में 30 मिनट से 3 घंटे तक खट्टे मैरिनेड में रखें। चौथा, पकाने से पहले नमक डालें, क्योंकि नमक नमी बनाए रखने में मदद करता है, और पकने के बाद मसाले छिड़कने से वह असर नहीं आता। पाँचवाँ, वसा जोड़ें, जैसे जैतून का तेल, पूरी वसा वाला सादा दही, साबुत तहिनी या मक्खन का एक टुकड़ा। छठा, पकाने का तरीका सोच-समझकर चुनें। उबालने या भाप में पकाने से स्वाद घटता है, इसलिए बेहतर है कि हल्का सुनहरा भूनें और अंदर का तापमान लगभग 75 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने दें, फिर थोड़ी देर आराम दें।
अगर कोई व्यंजन फीका निकले, तो लेख सुझाता है कि उसे गाढ़ी चटनी या शोरबे से बचाया जा सकता है, करी या टैगिन में बारीक करके डाला जा सकता है, पेस्टो में मिलाया जा सकता है, या क्रीमी पास्ता या टैको में डाला जा सकता है। मुझे यह सलाह पसंद आई, क्योंकि यह सरल है और इसके लिए कोई खास उपकरण नहीं चाहिए।
स्रोत: Al Jazeera Net
बटागोर, बांडुंग का एक नाश्ता है जिसका नाम "तली हुई मछली और टोफू की गोलियाँ" जैसा है। इसे हाल ही में अच्छी खबर मिली है। detikFood के अनुसार TasteAtlas 2026 ने इसे दुनिया के 100 सबसे अच्छे तले हुए व्यंजनों की सूची में 5 में से 4.4 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रखा है। तली हुई चीज़ें मुझे बहुत पसंद हैं, इसलिए यह खबर पढ़कर मैंने इसकी रेसिपी लिख लेने का सोचा।
यह रेसिपी लेखिका येन्नी मुस्तिका सारी की है। यह 2 लोगों के लिए है और बनाने में आसान है। घोल के लिए 200 ग्राम टैपिओका आटा, 150 ग्राम मैदा, सफ़ेद टोफू का 1 टुकड़ा (छोटे टुकड़ों में कटा हुआ), 1 अंडे की जर्दी, थोड़ा स्टॉक पाउडर और 2 हरे प्याज़ बारीक कटे हुए चाहिए। पीसे जाने वाले मसाले के लिए 4 छोटे प्याज़, 2 लहसुन की कलियाँ, आधा छोटा चम्मच सफ़ेद काली मिर्च पाउडर, और नमक व चीनी स्वादानुसार लें।
मूंगफली की चटनी के लिए पहले 3 लाल मिर्च, 2 लहसुन की कलियाँ और एक मुट्ठी मूंगफली हल्की भून लें। फिर इन्हें 1 बड़ा चम्मच ताड़ की चीनी, नमक, चीनी और थोड़े पानी के साथ पीस लें।
बनाने का तरीका: टोफू को 5 मिनट नमक वाले पानी में भिगो दें। मसाले को अच्छी तरह पीसकर मैदा, टैपिओका आटा, हरे प्याज़ और अंडे की जर्दी के साथ मिलाएँ। धीरे-धीरे पानी डालते हुए घोल गाढ़ा और हल्का चिपचिपा होने तक फेंटें। मध्यम आंच पर तेल गरम करें, टोफू के टुकड़ों को घोल में लपेटकर सुनहरा और अंदर तक पकने तक तलें, फिर छानकर निकालें। मूंगफली की चटनी, मीठी सोया सॉस और सांबल के साथ परोसें।
लेख में एक व्यावहारिक सुझाव भी है: घोल बिना मछली के बनाया जा सकता है, जिससे काम आसान हो जाता है। मुझे यह घर के खाने के लिए बिल्कुल सही लगता है, और मैं इस सप्ताहांत इसे आज़माने वाली हूँ, खासकर उनके लिए जो बांडुंग से दूर रहते हैं और इस नाश्ते को याद करते हैं।
स्रोत: detikFood
China News Service ने हाल ही में राष्ट्रीय आपातकालीन प्रसारण सेवा की एक भंडारण सलाह दोबारा प्रकाशित की है, जिसमें कहा गया है कि अंडों को रखने से पहले नहीं धोना चाहिए। इसकी वजह लियाओनिंग प्रांत के शेनयांग का एक मामला था, जहाँ एक तीन सदस्यीय परिवार स्क्रैम्बल्ड एग्स खाने के बाद बीमार पड़ गया। जाँच में पाया गया कि कारण खराब अंडे थे, और उनके खराब होने की वजह रखने से पहले उन्हें धोना था। लेख में हुबेई प्रांतीय कृषि विज्ञान अकादमी की शोधकर्ता सुन जिंग इस बात को समझाती हैं।
सिद्धांत सीधा है। अंडे के छिलके पर पानी में घुलने वाली एक जेली जैसी सुरक्षा परत होती है, जो बैक्टीरिया और फफूँद को अंदर जाने से रोकती है और नमी के उड़ने को कम करती है। धोने या भिगोने से यह परत टूट जाती है, और साल्मोनेला जैसे सूक्ष्मजीव अंडे के अंदर पहुँच सकते हैं। फ्रिज में भी धुले हुए अंडे कहीं ज़्यादा जल्दी खराब होते हैं। अगर गलती से धो दिए हों, तो जल्द से जल्द पकाएँ, या ठंडा रखकर तीन दिनों के भीतर खा लें।
छिलका गंदा हो तो क्या करें? विशेषज्ञ सुझाते हैं कि ढीली गंदगी को सूखे कपड़े या सूखे कागज़ के तौलिये से हल्के हाथ से पोंछ दें। अगर उस पर बहुत मल या खून लगा हो, तो हो सकता है अंडा खुद ताज़ा न हो, इसलिए ऐसे अंडे खरीदने से बचना बेहतर है। खरीदते समय भरोसेमंद बड़े सुपरमार्केट के जाने-माने ब्रांड चुनें, और उत्पादन की तारीख जितनी नई हो उतना अच्छा है। बिना तारीख वाले खुले अंडों की जाँच के दो आसान तरीके हैं। छिलके को छूकर देखें: अगर वह बहुत चिकना लगे, तो सुरक्षा परत लगभग मिट चुकी है और ताज़गी कम हो गई है। अंडे को कान के पास हिलाएँ: ताज़ा अंडा लगभग कोई आवाज़ नहीं करता, जबकि पुराना अंडा, जिसकी सफेदी पतली हो गई और जर्दी खिसक गई, हल्की खड़खड़ाहट की आवाज़ देता है।
भंडारण के कुछ और नियम भी हैं। अंडों को फ्रीज़ न करें, क्योंकि जर्दी जम जाती है और छिलका फट सकता है। उन्हें दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ न रखें: छिलके पर कई रोगाणु और गंदगी होती है, इसलिए फ्रिज में रखने से पहले उन्हें अलग रखें ताकि क्रॉस-संदूषण न हो। अंडों को चौड़े सिरे को ऊपर रखें, ताकि हवा वाला हिस्सा ऊपर रहे; इससे जर्दी के छिलके की ओर खिसककर खराब होने का खतरा कम होता है। फ्रिज के 0 से 4 डिग्री सेल्सियस वाले ताज़ा रखने के खाने में सामान्य ताज़े अंडे आम तौर पर एक से दो महीने तक रह जाते हैं।
इस लेख में मुझे सबसे उपयोगी बात यह लगी कि यह उन आदतों के कारण समझाता है जिन्हें हम सहज मान लेते हैं। जब अंडे गंदे दिखते हैं तो मन करता है कि उन्हें धो दें, जबकि ठीक यही कदम सबसे ज़्यादा समस्या पैदा करता है। अगली बार अंडे फ्रिज में रखने से पहले यह एक बात याद रखें: रखने से पहले अंडे का छिलका कभी न धोएँ।
स्रोत: China News Service
जैसे ही शामें ठंडी होने लगती हैं, मैं अपना कास्ट-आयरन का बर्तन फिर से निकाल लेता हूँ। इस हफ़्ते मैंने अक्टूबर की शुरुआत में प्रकाशित बीफ़ बुर्गिन्यों का एक बढ़िया संस्करण आज़माया: पालेरों (कंधे का मांस) और जीत आ ला नुआ (जांघ का मांस), बरगंडी की पिनो नुआर वाइन, स्मोक्ड लार्डों और मक्खन में सुनहरे किए हुए मशरूम।
राज़ मुश्किल होने में नहीं, धीमेपन में है। गाजर, लौंग चुभोए प्याज़, लहसुन और बुके गार्नी के साथ 12 से 24 घंटे मैरिनेट करें। अगले दिन मांस को अच्छी तरह छान लें (वरना वह सुनहरा होने के बजाय उबलने लगेगा), लार्डों भूनें, टुकड़ों को तेज़ आँच पर सेंकें, ऊपर से आटा छिड़कें, छना हुआ मैरिनेड डालें और 150 °C पर तीन घंटे धीमी आँच पर पकने दें।
जिस बात ने मुझे क़ायल किया: पालेरों (मुलायम, मुँह में घुल जाने वाला) / जीत (आकार बनाए रखने वाला) की जोड़ी, और यह सोच कि कभी ऐसी वाइन से खाना न पकाएँ जिसे आप ख़ुद न पिएँ। मशरूम अलग से, अच्छी रंगत आने तक पकाए जाते हैं, और पकाने के आख़िर में ही बर्तन में मिलाए जाते हैं। आँच से उतारकर पंद्रह मिनट रहने दें, और सॉस अपने आप गाढ़ी हो जाती है।
मैं इसे हल्के नमकीन मक्खन वाले मैश्ड आलू या ताज़ा टालियाटेले के साथ परोसता हूँ। और हाँ, अगले दिन यह और भी स्वादिष्ट लगता है। अगर आप पतझड़ का ऐसा व्यंजन ढूँढ रहे हैं जिसमें सचमुच बरगंडी की ख़ुशबू हो, तो यह धैर्य के लायक है।
स्रोत: Délice et Gastronomie