कैसेट और विंटेज ऑडियो
टेप डेक, रिसीवर, टर्नटेबल: मरम्मत और संग्रह।
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Manche Geschichten aus der HiFi-Welt klingen zu schön, um wahr zu sein. Diese gehört dazu: In einem abgelegenen Lager standen 70 originalverpackte Kartons mit AEC C81 – hochwertigen Direktantriebs-Plattenspielern aus den frühen 1980er-Jahren. „New Old Stock“, wie die Profis sagen. Jetzt kommen sie nach und nach in den Handel.
Gefunden hat sie Claus Bücher, der in Taunusstein ein HiFi-Studio betreibt. Das Lager hatte einst sein 2022 verstorbener Freund Hermann Hoffmann angemietet, der über tausend AEC-Plattenspieler aus Japan nach Europa gebracht hatte. 1983 kostete ein C81 1.285 D-Mark – ausgerechnet in der Zeit, als die CD zum Heilsbringer wurde und Plattenspieler vielen plötzlich als veraltet galten.
Technisch ist das Laufwerk spannender, als die Optik vermuten lässt: Direktantrieb von der japanischen Kultmarke Micro Seiki, ein 1,5 Kilo schwerer Aluteller, beleuchtet von einer roten Lampe mit vier Stroboskop-Ringen (33⅓ und 45 U/min, jeweils für 50 und 60 Hz). Bei der Auffrischung half Hartmut Perner aus Wiesbaden, der lange bei Lenco gearbeitet hat: Zwei ausgetrocknete Elkos im Netzteil wurden getauscht, und statt des ursprünglich vorgesehenen Decca-Arms (die letzten 100 Stück sind verschwunden) sitzt jetzt ein Lenco L75 aus derselben Epoche drauf – samt „Korkenzieher“ für das Antiskating-Gewicht und dem Spitznamen „Bahnschranke“.
Im Hörtest mit einem Ortofon MC X10 klang der Oldie eher weich, weitgehend neutral, mit weiter Abbildung, viel Feindynamik und gutem Timing. Gegen einen modernen Clearaudio Concept Signature wirkte er softer, aber ohne Einbrüche. Kritikpunkt: recht anfällig für Trittschall. Preis: 1.450 Euro ohne System, 1.750 Euro mit justiertem Ortofon MC X10, dazu ein Jahr Garantie.
Mir gefällt vor allem der Gedanke dahinter: kein Retro-Nachbau, sondern echte Geräte von damals, behutsam fit gemacht – und es gibt nur diese 70. Wer einen live sehen will: Claus Bücher stellt auf der Finest Audio Show am 17. und 18. Oktober im darmstadtium in Darmstadt aus. Infos:
https://www.cba-audio.de/
Quelle: LowBeats
मैंने हाल ही में सुना कि कैसट टेप फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं, इसलिए मैंने अपने पुराने डेक और टेप को अलमारी के पीछे से निकाला। सीडी के लोकप्रिय होने से पहले, संगीत "रिकॉर्ड" करने का एकमात्र साधन कैसट ही था। रेडियो पर बजने वाले गानों को रिकॉर्ड करने, किराए की सीडी लेकर उन्हें कैसट में कॉपी करने वाले दिनों को, ऐसा लगता है जैसे कल की बात हो।
उस समय की एक खास बात थी टेप का चुनाव। TDK, SONY, maxell, AXIA, That's—एक ही "नॉर्मल" श्रेणी में भी कई अलग-अलग ग्रेड के टेप होते थे, और सिर्फ उनके कवर और डिज़ाइन को देखकर ही समय कट जाता था। मैं रिकॉर्डिंग लेवल को मीटर पर पूरी तरह से बढ़ाकर और डॉल्बी नॉइज़ रिडक्शन को चालू करके, एक-एक करके अपने "सर्वश्रेष्ठ" संग्रह बनाता था।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि वही मेहनत ही लगाव पैदा करती थी। टेप के कट जाने और गाने के बीच में रुक जाने का दुख, और ए-साइड और बी-साइड के बीच के कट को कैलकुलेट करने की चिंता, सब कुछ मिलाकर मुझे पसंद था। मैं हमेशा नाकामिची के DRAGON को पाने की चाह रखता था, लेकिन अंततः वह मेरे हाथ नहीं लगा। फिर भी, यह जानकर खुशी हुई कि अभी भी TASCAM जैसी कंपनियां कैसट डेक बनाती हैं, और अब मेरे पास उन पुराने टेपों को डिजिटल करने का एक बहाना मिल गया है।
स्रोत: JATO ऑनलाइन शॉप मैगज़ीन।
AV Watch के एक लेख से पता चला कि Magnetic Laboratory (Jiki Kenkyujo) "Nomal Position/Type-I" नाम की एक नई संगीत कैसेट ला रही है। इसकी कीमत 1,100 येन प्रति नग है और बिक्री 13 अक्टूबर से शुरू होगी। मात्रा सीमित है और यह केवल उनके अपने स्टोर MAG-LAB में मिलेगी।
प्री-सेल 12 अक्टूबर को "CASSETTE WEEK MARKET 2026" कार्यक्रम में Magnetic Laboratory के बूथ पर होगी, जहां इसे सुना भी जा सकेगा। जुलाई 2026 में आई "High Position/Type-II" के बाद यह कंपनी की दूसरी नई कैसेट है।
इसकी खासियत उच्च घनत्व वाला चुंबकीय पदार्थ है। कहा गया है कि नॉर्मल पोज़िशन (टाइप I) टेप के बीच भी इसकी विशेषताएं उत्कृष्ट हैं। लेख के अनुसार इसमें मध्य और निम्न आवृत्तियों में भराव है, ऊंची आवृत्तियों की प्रतिक्रिया भी अच्छी है, और पूरे बैंड में आवृत्ति प्रतिक्रिया सपाट है। इंडेक्स कार्ड High Position/Type-II जैसा ही है: काले आधार पर चांदी का इंडेक्स, सामने और पीछे के कुछ हिस्से पर लिखने की जगह, और एक इंडेक्स स्टिकर भी साथ मिलता है। ये कैसेट घरेलू केंद्र "磁気研カセットラボラトリ" में एक-एक करके असेंबल होती हैं।
मुझे व्यक्तिगत रूप से यह अच्छा लगा कि जापान में नए खाली कैसेट टेप फिर से बनाए जा रहे हैं। डेक की देखभाल कितनी भी अच्छी हो, टेप न मिले तो आधा मज़ा चला जाता है। मैं खरीदने वालों की राय का इंतज़ार करूंगा कि इसकी असली आवाज़ कैसी है।
मुझे लगता है यहां भी कई डेक के मालिक होंगे। आप आम तौर पर नॉर्मल या हाई पोज़िशन टेप इस्तेमाल करते हैं?
स्रोत: AV Watch
Antyweb पर Konrad Kozłowski का एक स्तंभ मिला, जो एक लीजेंडरी कैसेट की वापसी के बारे में है। Maxell, दुकानों की श्रृंखला Disk Union के साथ मिलकर UD-60U मॉडल फिर से बना रही है। यह टाइप I का आयरन टेप है, जो 1970 के दशक में Sony और TDK के उत्पादों से मुकाबला करता था।
UD सीरीज़ 1970 में आई थी, और मूल UD-60U में 60 मिनट की रिकॉर्डिंग होती थी। नए संस्करण में पुराना रूप बरकरार है, लेकिन काले और लाल रंग के नए विकल्प जोड़े गए हैं जो Disk Union के रंगों की याद दिलाते हैं। फिलहाल यह केवल जापान में बिक रहा है, इसलिए यूरोप और उत्तरी अमेरिका के प्रशंसकों को इंतज़ार करना होगा। एक कैसेट की कीमत 990 येन है, लगभग 23 ज़्लॉटी, और तीन का सेट 2,900 येन का है, लगभग 68 ज़्लॉटी।
Disk Union का तर्क दिलचस्प है: डिजिटल युग से पहले कैसेट बदलना संगीत साझा करने का मूल तरीका था। कंपनी यह भी सुझाती है कि कैसेट की खास आवाज़ पाने के लिए विनाइल रिकॉर्ड से रिकॉर्डिंग की जाए।
लेखक बताते हैं कि टाइप I टेप हाई-फ़ाई रिकॉर्डिंग के लिए सबसे अच्छे नहीं हैं; उसके लिए क्रोम टाइप II या मेटल टाइप IV बेहतर हैं। लेकिन 8-बिट कंप्यूटरों के लिए, जैसे Datassette वाला Commodore 64, ZX Spectrum, Amstrad CPC, BBC Micro और MSX, ये डेटा स्टोरेज माध्यम के रूप में बहुत उपयुक्त हैं। Maxell पहले भी अपने इतिहास की ओर लौट चुकी है: 2016 में उसने रेट्रो पैकेजिंग में कैसेट निकाले थे, और 2025 में Disk Union के साथ UD-60U की पहली खेप बनाई, जिसने काफी ध्यान खींचा।
सबसे अच्छा मुझे यह लगता है कि अब भी कोई नए खाली कैसेट बना रहा है। आपका रिकॉर्डिंग के लिए पसंदीदा टेप प्रकार कौन-सा है?
स्रोत: Antyweb
रेट्रो तकनीक की एक मज़ेदार मिसाल: एक ऐसा कैमरा जो SD कार्ड के बजाय साधारण ऑडियो कैसेट पर अपनी तस्वीरें सहेजता है। यह प्रोजेक्ट Jordan Blanchard का है।
कैमरा मॉड्यूल वाला एक ESP32 तस्वीर लेता है, और फ्रेम तय करते समय एक छोटी स्क्रीन लाइव पूर्वावलोकन दिखाती है। इसके बाद डिजिटल छवि को एनालॉग ऑडियो में बदलकर टेप पर रिकॉर्ड किया जाता है। इसमें स्लो-स्कैन टेलीविज़न (SSTV) का वही विचार इस्तेमाल हुआ है, जिससे रेडियो शौकिया दशकों से तस्वीरों को ध्वनि के रूप में भेजते आए हैं।
प्लेबैक का काम RP2040 संभालता है, जो टेप चलने के दौरान ऑडियो पकड़ता है और तस्वीर को दोबारा बनाता है। मूल से यथासंभव मेल खाने के लिए इसमें कई तरकीबें इस्तेमाल हुई हैं, और एक वैकल्पिक सीरियल कनेक्शन से अंतिम प्रसंस्करण कंप्यूटर कर सकता है। तस्वीरों में SSTV की वही विशिष्ट झलक बनी रहती है, जो एनालॉग माध्यम से ही आती है। कैसेट डेक भी खास तौर पर बनाया गया है।
लेख में छवि का रिज़ॉल्यूशन, टेप की गति या स्थानांतरण के समय नहीं बताए गए हैं, इसलिए ये विवरण प्रोजेक्ट पेज पर मिलेंगे। फिर भी मुझे यह पसंद है कि यह कैसेट को फिर से एक डेटा माध्यम की तरह देखता है। कैसेट डेक जमा करने वालों के लिए यह याद दिलाता है कि ये मशीनें आज भी चौंकाने वाले काम कर सकती हैं।
स्रोत: Hackaday
Son-Vidéo.com ब्लॉग ने मार्च 2026 में कैसेट की वापसी पर एक लंबा लेख प्रकाशित किया, और मैंने उसे रुचि से पढ़ा। शुरुआत उस प्रारूप से होती है जिसे पहले सीडी और फिर स्ट्रीमिंग ने दफ़्न मान लिया था, पर अब वह नई पीढ़ी को फिर से आकर्षित कर रहा है। लोग कुछ ऐसा चाहते हैं जिसे हाथ में पकड़ा जा सके, और सुनने का एक धीमा तरीका।
लेख पहले इतिहास याद दिलाता है। फ़िलिप्स ने 1960 के दशक में कॉम्पैक्ट कैसेट पेश किया, जो हाई-फ़ाई सिस्टम, कार के रेडियो और पोर्टेबल प्लेयर में जगह बना बैठा, फिर 1980 और 1990 के दशक में सोनी और फ़िलिप्स की सीडी ने उसकी जगह ले ली। आज कैसेट एक जनप्रिय प्रारूप की बजाय वैकल्पिक चुनाव के रूप में लौट रही है। कुछ कलाकार अब भी सीमित संस्करण में एल्बम निकालते हैं, और संस्था Intertapes गुमनाम कैसेट, जो मिल गई या छोड़ दी गईं, डिजिटल करती है और उन्हें सांस्कृतिक गवाही मानती है।
लेखक इस चलन को “एनालॉग लाइफ़स्टाइल” के रुझान से जोड़ता है। डिजिटल भराव और स्वचालित सुझावों से थके लोग टेप की एक तरफ़ चुनते हैं और एल्बम को उसके मूल क्रम में सुनते हैं, जिसकी आवाज़ पूरी तरह सटीक नहीं पर गर्म होती है। वह जनवरी 2026 में CNN के एक लेख का भी ज़िक्र करता है, जो एनालॉग शौक़ों पर था।
उपकरणों की सिफ़ारिशें ठोस हैं। चलते-फिरते के लिए: शुरुआती Muse M-152, थोड़ा बेहतर FiiO CP13, या We Are Rewind प्लेयर। घर के लिए: Teac W-1200 डेक, जो हाई-फ़ाई सिस्टम से जुड़ता है, और Teac AD-850-SE/B, जो सीडी प्लेयर और कैसेट डेक को मिलाकर USB से MP3 रिकॉर्डिंग भी करता है।
मुझे सबसे ज़्यादा वह हिस्सा याद रहा जो रेडियो से रिकॉर्ड किए गए संकलनों के बारे में है, जिनमें अक्सर किसी गाने की शुरुआत छूट जाती थी। यही अपूर्णता उन्हें भावनात्मक मूल्य देती है। कैसेट शायद फिर कभी प्रमुख नहीं होगी, पर उसकी वापसी अधिक सचेत तरीके से सुनने का निमंत्रण है।
स्रोत: Blog Son-Vidéo.com
AM प्रसारण धीरे-धीरे खत्म होने के साथ कई पुराने ट्यूब रेडियो अब शेल्फ़ की सजावट बनते जा रहे हैं। इस हफ़्ते Hackaday पर आए एक प्रोजेक्ट का मकसद इसे बदलना है। Gareth Davies ने ESP32-S3 के इर्द-गिर्द एक छोटा AM ट्रांसमीटर बनाया है, जो इंटरनेट रेडियो स्ट्रीम लेकर उसे फिर से प्रसारित करता है, ताकि कोई विंटेज रेडियो उसे दोबारा पकड़ सके। कोड उनकी GitHub रिपॉज़िटरी esp32-am-transmitter में है।
दिलचस्प बात यह है कि इसमें हार्डवेयर बहुत कम लगता है। इसमें कोई अलग RF चिप नहीं है। रेडियो सिग्नल GPIO पिन से सीधे पल्स की श्रृंखला के रूप में बनता है, और 3D-प्रिंटेड बॉक्स में एक दूर-दूर लिपटी तार की कॉइल है, जो बस इतना विकिरण करती है कि पास का रेडियो उसे पकड़ सके। आउटपुट यूरोप के लॉन्ग-वेव बैंड में 200 kHz पर है, हालाँकि लेख अनुमान लगाता है कि मीडियम-वेव आवृत्ति भी बन सकती है।
टिप्पणियाँ भी प्रोजेक्ट जितनी ही दिलचस्प हैं। पाठक बताते हैं कि बिना फ़िल्टर के GPIO पल्स ट्रेन से हार्मोनिक्स इच्छित आवृत्ति से कहीं आगे तक जा सकते हैं, और निर्माता खुद मानते हैं कि कई देशों में यह गैरकानूनी हो सकता है। दूसरे लोग नरम तरीके सुझाते हैं, जैसे रेडियो के FM इनपुट को एक छोटा FM ट्रांसमीटर खिलाना।
पढ़ने में यह अच्छा विचार है, लेकिन अगर आप कुछ ऐसा आज़माना चाहते हैं तो पहले अपने इलाके के रेडियो नियम जाँच लें और पावर बहुत कम रखें। यह याद दिलाता है कि पुराने ऑडियो उपकरण को बहाल करना सिर्फ़ हार्डवेयर का मामला नहीं है, बल्कि उसे सुनने लायक कुछ देने का रास्ता बनाए रखने का भी मामला है।
स्रोत: Hackaday
hifi.nl पर रूड जोंकर की एक रिपोर्ट है, जिसमें उन्होंने दुकान Rhapsody में सुने गए Supatrac टोनआर्म के बारे में लिखा है। इसमें आविष्कारक रिचर्ड ब्रेन के साथ बातचीत भी जोड़ी गई है। मुझे इसका सबसे सुंदर हिस्सा आविष्कारक की कहानी लगा, क्योंकि यह पुराने उपकरणों से शुरू होती है।
लॉकडाउन के दौरान ब्रेन को एक पड़ोसी घर से पुराना सामान मिला: एक LEAK Stereo 20 एम्पलीफ़ायर और 1963 के दो Garrard 301 टर्नटेबल, जिन पर SME 3009 आर्म और Ortofon SPU कार्ट्रिज लगे थे। LEAK एम्पलीफ़ायर उन्होंने eBay पर बेच दिए और Garrard अपने पास रखे। वे इन्हें बेहतर आर्म देना चाहते थे। उन्होंने Well Tempered आर्म को शुरुआती बिंदु माना, पर उसे बहुत विनम्र और कुछ नीरस लगा, इसलिए उन्होंने अपना संस्करण डिज़ाइन किया। पंद्रह साल की उम्र में ही वे 300 पाउंड की विरासत से एक सेकेंड-हैंड Linn Sondek खरीद चुके थे।
मुख्य विचार बेयरिंग में है। घुमाव का बिंदु कार्ट्रिज के सामने वाले एक ही बिंदु तक सीमित कर दिया गया है, और आर्म दो तारों से लटकता है जो एक शीर्ष पर मिलते हैं। इससे घर्षण कम और पार्श्व तथा ऊपर-नीचे दोनों दिशाओं में गति की स्वतंत्रता अधिक होने की बात कही गई है। यह सर्वश्रेष्ठ सिरेमिक ABEC बेयरिंग से बेहतर है, यह ब्रेन का अपना दावा है। ट्यूब समानांतर रेशों वाला कार्बन फ़ाइबर है और अब भी लंदन में बनती है। कई लंबाइयाँ उपलब्ध हैं; मानक संस्करण Rega, Linn, Technics और SME पर फ़िट होता है, और दूसरे टर्नटेबल के लिए नाप के अनुसार माउंट बनाए जाते हैं।
Rhapsody में यह आर्म (Blackbird और Nighthawk) Marten Coltrane Statement Quintet स्पीकरों और एक Döhmann Helix Two MK3 के साथ सेट में बज रहा था। समीक्षक इसे अपने अनुभव के सबसे अच्छे एनालॉग प्रदर्शनों में से एक बताते हैं, पर सावधान रहते हैं: नतीजा पूरे सिस्टम के तालमेल से आता है। ब्रेन खुद कहते हैं कि विनाइल बहुत स्थिर है और पाँच सौ साल बाद भी अच्छी हालत में रहेगा, जबकि चुंबकीय टेप ऐसा नहीं है। पुराने टेप और रिकॉर्ड जमा करने वालों की दुनिया में यह बात मन में रह जाती है।
स्रोत: hifi.nl
Hackaday के Al Williams ने एक रेस्टोरेशन के बारे में लिखा, जो मुझे अजीब तरह से संतोषजनक लगा: लगभग 1965 का एक Heathkit AJ-43C स्टीरियो ट्यूनर, जिसे RCD66 ने रीसाइकल बिन से बचाया और पूरा काम एक YouTube वीडियो में दर्ज किया।
ट्यूनर की हालत खराब थी। हर इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर ख़राब निकला, जो इतनी पुरानी इकाई के लिए हैरानी की बात नहीं है। अलग-अलग खराबियों के पीछे भागने के बजाय RCD66 ने पूरा दोबारा काम करने का फ़ैसला किया: ज़्यादातर पुर्ज़े निकालकर बदले गए, और जर्मेनियम ट्रांज़िस्टर जाँचे गए ताकि जो अब भी ठीक थे उन्हें वापस लगाया जा सके। कई सर्किट बोर्ड पर काम हुआ, और ज़ेनर डायोड वाली मूल पावर सप्लाई की जगह एक आधुनिक डिज़ाइन लगाई गई।
Al Williams का मानना है कि ऐसी इकाई के लिए पूरा काम दोबारा करना समझदारी भरा तरीका है, और मैं भी उनसे सहमत हूँ। जब एक ही प्रकार के सारे पुर्ज़े ख़राब हो जाएँ, तो उन्हें एक-एक करके ठीक करने के बजाय सब बदल देना तेज़ और ज़्यादा भरोसेमंद होता है। यह किट मूल रूप से 130 डॉलर में बिका था, और अच्छा लगता है कि उस इतिहास का एक हिस्सा कबाड़ के ढेर से बच गया।
लेख यह नहीं बताता कि तैयार ट्यूनर कैसी आवाज़ देता है, इसके लिए वीडियो देखना होगा। टिप्पणियों में एक पाठक ने AM और FM के अलग ट्यूनिंग नॉब, तीन-खंड वाले AM ट्यूनिंग कैपेसिटर, कई डुअल-ट्यून्ड IF चरणों और ट्रिमेबल स्टीरियो डिमल्टिप्लेक्सर की ओर ध्यान दिलाया, और संवेदनशीलता सुधारने के लिए FM RF इनपुट ट्रांज़िस्टर बदलने का सुझाव दिया।
पुराने रिसीवर और ट्यूनर जमा करने या ठीक करने वालों के लिए यह याद दिलाने वाली अच्छी बात है कि 1960 के दशक की इन किटों में कितनी सावधान इंजीनियरिंग छिपी है।
स्रोत: Hackaday
Hackaday की Jenny List ने एक ऐसा वीडियो सुझाया है जो इस बोर्ड के मिज़ाज से बिल्कुल मेल खाता है: YouTube चैनल Ken's Shop द्वारा एक Realistic कैसेट डेक की पूरी सर्विस। यह बिना एडिट किया गया बेंच सेशन है, जिसे देखना उन्हें सुकून भरा लगा। Ken का अनुमान है कि यह डेक 1970 के दशक के अंत या 1980 के दशक की शुरुआत का है।
उनका तर्क है कि ये डेक अच्छी तरह बने होते हैं, सेकंड-हैंड बाज़ार में आम हैं, और इनका काम आम तौर पर एक बेंच सेशन से ज़्यादा नहीं होता। वे आम काम गिनाती हैं: दशकों पुराने मैकेनिकल हिस्सों की सफाई और लुब्रिकेशन, शायद घिस चुकी बेल्ट बदलना, और ज़रूरत हो तो एज़िमथ एडजस्टमेंट यानी हेड्स का संरेखण। काम थोड़ा नाज़ुक है, पर अपेक्षाकृत आसानी से ठीक हो जाता है।
कमेंट थ्रेड भी देखने लायक है। एक पाठक लिखते हैं कि पुराने इलेक्ट्रोमैकेनिकल डेक लगभग हमेशा चलते थे और उनकी सर्विस आसान थी, जबकि नए लॉजिक-आधारित डेक ज़्यादा खराब होते हैं और उन्हें ठीक करना मुश्किल होता है। कोई Realistic SCT-24A (मॉडल 14-613) का पार्ट्स मैनुअल खोज रहा है, और एक सदस्य के पास 1974 के आसपास खरीदा AKAI GXC 46D है जो आज भी चलता है, उन्होंने audio-database.com और hifiengine.com के मैनुअल आर्काइव के लिंक भी दिए हैं।
मुझे इस बात की याद दिलाना अच्छा लगा कि रेस्टोरेशन किसी महंगे प्रोजेक्ट से शुरू होना ज़रूरी नहीं। बेल्ट, लुब्रिकेशन और हेड एलाइनमेंट की सर्विस अक्सर दराज़ की सजावट और चलने वाले डेक के बीच का फर्क होती है। मूल वीडियो YouTube पर Ken's Shop चैनल में है (
https://www.youtube.com/watch?v=fQM_7QyXq_o)।
अगर आपके पास कोई डेक है जो अपनी पहली सर्विस का इंतज़ार कर रहा है, तो आपकी चेकलिस्ट में क्या है? मॉडल लिख दीजिए, मैं ख़ुशी से मैनुअल खोजूंगा।
स्रोत: Hackaday
Correio Braziliense में एक लेख पढ़ते हुए मैं ठहरकर सोचने लगा। Discogs, जो डिजिटल रिकॉर्ड कैटलॉग के रूप में जाना जाता है, अब अपने ब्रांड का एक पोर्टेबल कैसेट प्लेयर लाकर संगीत के भौतिक उपभोग में भी उतरने वाला है। यह खबर सबसे पहले Music Ally ने दी थी और उसे साइट Moneyhits ने आगे बढ़ाया।
लेख का तर्क है कि कैसेट की वापसी सिर्फ पुरानी यादों का मामला नहीं है। यह उन श्रोताओं के लिए एक प्रीमियम रणनीति होगी जो डिजिटल की क्षणभंगुरता से थक चुके हैं, खासकर Gen Z, जिसे मालिकाना एहसास और बिना गाने छोड़े पूरा एल्बम सुनने का अनुभव पसंद आएगा। लेखक के अनुसार Discogs संग्राहकों की इच्छाएं अच्छी तरह जानता है, इसलिए वह केवल डेटा और कीमतों की सूची न रहकर खुद उपभोग का अनुभव दे सकता है।
लेख यह भी कहता है कि कैसेट बनाना वाइनल से सस्ता है और इसमें आकर्षक मुनाफा है। स्वतंत्र लेबल के साथ Warner Records और Sony Music भी सीमित संस्करण निकाल सकते हैं, जो जल्दी बिकते हैं और दोबारा बिक्री के बाज़ार को बढ़ाते हैं। लंदन और साओ पाउलो को स्वतंत्र संगीत दृश्यों के उदाहरण के रूप में गिनाया गया है।
निष्पक्ष रूप से देखें तो यह पाठ आंकड़ों वाली रिपोर्ट से ज़्यादा विश्लेषण और राय है। डिवाइस की कीमत, बिक्री की मात्रा या वृद्धि के आंकड़े नहीं दिए गए, इसलिए मिनटों में बिक जाने का दावा अप्रमाणित है। फिर भी मुझे लगता है कि किसी संग्राहक मंच का डिवाइस बनाने में उतरना अहम है, क्योंकि अच्छे प्लेयर ढूंढना इस फॉर्मेट की हमेशा से एक बाधा रहा है।
अगर आप कैसेट इकट्ठा करते हैं या डेक की मरम्मत करते हैं, तो यहां बताइए: इस फॉर्मेट को अब क्या चाहिए ताकि वह सिर्फ सीमित दायरे का उत्पाद न रहे?
स्रोत: Correio Braziliense
कैसेट और वाल्व रेडियो का शौकीन होने के नाते मैं ऐसी खबरें नहीं छोड़ता। कोन्या में 67 वर्षीय अब्दुर्रहीम जेविज़ आधी सदी से इलेक्ट्रॉनिक मरम्मत का काम कर रहे हैं; वे ग्रामोफ़ोन, वाल्व रेडियो, रील-टू-रील टेप रिकॉर्डर और पुराने टेलीविज़न को फिर से चालू कर देते हैं।
उन्होंने 1972 में एक शागिर्द के रूप में शुरुआत की और सेना से लौटने के बाद अपनी दुकान खोली। वे खास तौर पर 80–100 साल पुराने रेडियो को उनकी मूल संरचना बिगाड़े बिना बहाल करते हैं: लकड़ी के कैबिनेट नए किए जाते हैं, वाल्व और गायब पुर्ज़े पूरे किए जाते हैं। उन्हीं के शब्दों में: “हम पुरानी चीज़ों को फिर से ज़िंदा करने की कोशिश करते हैं ताकि वे फेंकी न जाएँ।”
मुझे सबसे ज़्यादा जिस बात ने छुआ, वह यह कि एंटीक का यह चलन सिर्फ़ संग्रह करना नहीं, बल्कि कचरे में जाने वाले उपकरणों को बचाने का काम है। नई पीढ़ी मुश्किलें खड़ी करती है, लेकिन पोते-पोतियाँ मदद करते हैं और प्रशिक्षु स्कूल भी उम्मीद जगाते हैं। डिजिटल युग में जब सब कुछ क्लाउड की ओर भाग रहा है, किसी का अब भी अपने हाथों से रील-टू-रील टेप रिकॉर्डर की मशीनरी ठीक करना मुझे बेहद कीमती लगता है।
अगर आपके घर में कोई चालू डेक या वाल्व रेडियो है, तो कभी-कभी सबसे अच्छा “अपग्रेड” नया डिब्बा खरीदना नहीं — बल्कि सही उस्ताद ढूँढना होता है।
स्रोत: Yeni Meram