नदियों के रंग-बिरंगे निवासी: किंगफ़िशर से लेकर सफ़ेद-कंधे वाले आइबिस तक
Burung Indonesia ने विश्व नदी दिवस के अवसर पर एक लेख प्रकाशित किया है, और पक्षी-प्रेमी होने के नाते मुझे लगता है कि नदियों को अक्सर भुला दिया जाता है। विश्व नदी दिवस हर साल सितंबर के चौथे रविवार को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2005 में हुई, जब संयुक्त राष्ट्र ने "जीवन के लिए जल" दशक शुरू किया था। यह विचार नदी-कार्यकर्ता मार्क एंजेलो का था।
लेख में नदियों के किनारे रहने वाले कुछ पक्षियों का परिचय है। कॉलर्ड किंगफ़िशर (Todiramphus chloris) IUCN की 2026 सूची में "कम चिंता" श्रेणी में है और टहनियों से गोता लगाकर मछली व छोटे जीवों का शिकार करता है। लगभग 46 सेमी ऊँचा जावा पॉन्ड-हेरॉन (Ardeola speciosa) किनारों पर शिकार का इंतज़ार करता है। बाकी दो प्रजातियाँ कहीं अधिक चिंताजनक हैं। सफ़ेद-कंधे वाला आइबिस (Pseudibis davisoni) गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और आज दुनिया में केवल लाओस, कंबोडिया और इंडोनेशिया में बचा है; पूर्वी कालीमंतन की महाकम नदी में इसे दर्ज किया गया है। जावा का स्थानिक ब्लू-ईयर्ड किंगफ़िशर (Alcedo euryzona) भी गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और वनक्षेत्र की नदियों पर निर्भर है।
सबसे दुखद है जावा लैपविंग (Vanellus macropterus), जावा का स्थानिक पक्षी, जो गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और शायद विलुप्त हो चुका है। 1930–1940 के बाद इसका कोई सत्यापित रिकॉर्ड नहीं है, और 2001 से 2012 के सर्वेक्षणों में यह नहीं मिला।
लेख में जल-गुणवत्ता के आँकड़ों ने मुझे निःशब्द कर दिया। 2025 की पहली छमाही की निगरानी में 1,482 नदियों के 4,482 स्थान शामिल थे: 70.7% स्थान प्रदूषित थे और केवल 29.3% गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे। DKI जकार्ता, रियाउ द्वीप समूह और दक्षिणी पापुआ में जाँचे गए सभी स्थान प्रदूषित थे।
सुझाव सरल हैं: नदियों में कचरा न फेंकें, एकल-उपयोग प्लास्टिक कम करें, किनारे की वनस्पति बचाएँ और आसपास के आवासों को नुकसान न पहुँचाएँ। समापन का उद्धरण भी सटीक लगता है: स्वस्थ नदी सिर्फ़ बहते पानी का नाम नहीं है।
स्रोत: Burung Indonesia
लेख में नदियों के किनारे रहने वाले कुछ पक्षियों का परिचय है। कॉलर्ड किंगफ़िशर (Todiramphus chloris) IUCN की 2026 सूची में "कम चिंता" श्रेणी में है और टहनियों से गोता लगाकर मछली व छोटे जीवों का शिकार करता है। लगभग 46 सेमी ऊँचा जावा पॉन्ड-हेरॉन (Ardeola speciosa) किनारों पर शिकार का इंतज़ार करता है। बाकी दो प्रजातियाँ कहीं अधिक चिंताजनक हैं। सफ़ेद-कंधे वाला आइबिस (Pseudibis davisoni) गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और आज दुनिया में केवल लाओस, कंबोडिया और इंडोनेशिया में बचा है; पूर्वी कालीमंतन की महाकम नदी में इसे दर्ज किया गया है। जावा का स्थानिक ब्लू-ईयर्ड किंगफ़िशर (Alcedo euryzona) भी गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और वनक्षेत्र की नदियों पर निर्भर है।
सबसे दुखद है जावा लैपविंग (Vanellus macropterus), जावा का स्थानिक पक्षी, जो गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और शायद विलुप्त हो चुका है। 1930–1940 के बाद इसका कोई सत्यापित रिकॉर्ड नहीं है, और 2001 से 2012 के सर्वेक्षणों में यह नहीं मिला।
लेख में जल-गुणवत्ता के आँकड़ों ने मुझे निःशब्द कर दिया। 2025 की पहली छमाही की निगरानी में 1,482 नदियों के 4,482 स्थान शामिल थे: 70.7% स्थान प्रदूषित थे और केवल 29.3% गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे। DKI जकार्ता, रियाउ द्वीप समूह और दक्षिणी पापुआ में जाँचे गए सभी स्थान प्रदूषित थे।
सुझाव सरल हैं: नदियों में कचरा न फेंकें, एकल-उपयोग प्लास्टिक कम करें, किनारे की वनस्पति बचाएँ और आसपास के आवासों को नुकसान न पहुँचाएँ। समापन का उद्धरण भी सटीक लगता है: स्वस्थ नदी सिर्फ़ बहते पानी का नाम नहीं है।
स्रोत: Burung Indonesia
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