Ik las laatst een stuk in De Telegraaf over hoe een zeldzame en dure plant het nieuwe statussymbool is geworden, en ik moest meteen aan mijn eigen vensterbank denken. Mijn eerste zeldzame Monstera was ooit een impulsaankoop, maar inmiddels kijk ik elke ochtend of er geen nieuw blad aan komt.
Het is gek hoe snel dit is gegaan. Waar een paar jaar geleden bijna niemand meer dan twintig euro voor een stekje betaalde, gaan er nu exemplaren voor honderden of zelfs duizenden euro's van de hand. Voor verzamelaars is het een mix van jacht, geduld en een beetje gekte — je grens verleggen hoort er nu eenmaal bij.
Wat ik er zelf zo mooi aan vind, is dat het geen passieve hobby is. Je leert echt over vochtigheid, licht en wortelrot, en je moet geduld hebben als een stekje wekenlang niets doet. Maar als er dan eindelijk een blad opent met die bijzondere tekening, is dat pure beloning.
Stiekem check ik nu ook regelmatig veilingen en plantenmarkten. Het is verslavend, maar wel een groene verslaving waar je huis alleen maar mooier van wordt.
Bron: De Telegraaf
हर सितंबर में फफूंद मक्खियाँ घरेलू पौधों की मिट्टी में लौट आती हैं। Gardening Know How पीले चिपचिपे ट्रैप से ज़्यादा आकर्षक समाधान सुझाता है: बटरवर्ट उगाना, जिसे उसके लैटिन नाम Pinguicula से ping भी कहते हैं।
बटरवर्ट छोटे मांसाहारी पौधे हैं। उनकी पत्तियाँ करीने से गुलाब जैसे गुच्छों में बढ़ती हैं और चिपचिपी ओस से ढकी रहती हैं, जिससे वे चांदी जैसी चमकती दिखती हैं, और मक्खियाँ आसानी से फँस जाती हैं। वसंत या गर्मी में पतले तनों पर छोटे फूल आते हैं। लेख के अनुसार बड़े पौधे मच्छरों को भी पकड़ लेते हैं।
सभी बटरवर्ट इस काम में एक जैसे अच्छे नहीं होते। मेक्सिकन या उष्णकटिबंधीय बटरवर्ट की पत्तियाँ चौड़ी और सपाट होती हैं, जिससे कीड़ों को बैठने की ज़्यादा जगह मिलती है, और वे उत्तरी अमेरिकी किस्मों से उगाने में आसान हैं, जिन्हें नम माहौल चाहिए और जो जल्दी सड़ जाती हैं। मेक्सिकन बटरवर्ट इतने मज़बूत होते हैं कि बिना ज़्यादा झंझट के खिड़की की चौखट पर रह सकते हैं।
लेख दो प्रजातियों का ज़िक्र करता है: Pinguicula cyclosecta, बैंगनी पत्तियों वाला बटरवर्ट, जिसके गहरे बैंगनी फूल होते हैं और पत्तियाँ लैवेंडर रंग की हो सकती हैं, और Pinguicula esseriana, जिसकी हल्की हरी पत्तियों पर गुलाबी आभा होती है और फूल हल्के बैंगनी होते हैं। दोनों लगभग 10 सेंटीमीटर ऊँचे और चौड़े होते हैं।
मुझे यह पसंद है कि इससे एक परेशानी संग्रह में कुछ अनोखा जोड़ने का कारण बन जाती है। यह छोटा, साफ-सुथरा पौधा शेल्फ पर अपनी जगह का हकदार है।
कोमो झील के किनारे विला एर्बा में ऑर्टिकोलारियो का सोलहवाँ संस्करण संपन्न हो गया है, और जिन्हें असामान्य पौधे पसंद हैं, उनके लिए यह रिपोर्ट पढ़ने लायक है। यह आयोजन 1 से 4 अक्टूबर 2026 तक चला, इसमें तीस हज़ार से अधिक लोग आए, और इसका विषय था «En rêverie», यानी सपनों और कल्पना के सहारे खुद को ले चलने का आमंत्रण।
प्रतिष्ठानों में मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया केंद्रीय मंडप की «हिप्नोस» ने: रेत, मिट्टी, जड़ों, लकड़ी और असामान्य पौधों से बने सोलह वनस्पति-दृश्यों का एक दोहरा सर्पिल, जिसके साथ इसी के लिए रचे गए प्रकाश और ध्वनि थे। बाहर, ऐतिहासिक उद्यान में, «फैंटासोस» ने लगभग अनजानी वनस्पति प्रजातियाँ दिखाईं। मुख्य पुरस्कार, लेक कोमो का «फोग्लिया डोरो», जेसुस सांज़-कास्त्रो और डैनियेला जिरौडो के बगीचे «रोज़ा वेलाटा» को मिला।
संग्राहकों के लिए सबसे दिलचस्प प्रदर्शकों के पुरस्कार हैं। डेनियेले रिघेट्टी के «स्ट्रेंजर प्लांट्स» ने वेनेज़ुएला के तेपुई पहाड़ों की दुर्लभ प्रजाति Stegolepis hitchcockii के साथ नवीनता पुरस्कार जीता। «Cactusmania by Manera» को Cyphostemma laza के लिए सुपर नमूना पुरस्कार मिला, «Meriania» ने Acacia और Vachellia का संग्रह पेश किया, और «Mondocactus» को रसीले पौधों और नर्सरी में पौधों की ट्रेसेबिलिटी पर काम के लिए सम्मानित किया गया।
«Per un Giardinaggio Evoluto 2026» पुरस्कार Codex Seraphinianus के लेखक लुइगी सेराफिनी को दिया गया। ऑर्टिकोलारियो जुटाई गई राशि स्थानीय सामाजिक संस्थाओं को दान करता है, और अगला संस्करण 30 सितंबर से 3 अक्टूबर 2027 के लिए पहले ही तय हो चुका है। मैंने तारीख़ नोट कर ली है। यह उन कुछ आयोजनों में से है जहाँ दुर्लभ वनस्पति सचमुच कला से मिलती है।
स्रोत: Greenme
मैंने अभी detikJatim की टिलैंड्सिया पर रिपोर्ट पढ़ी। यह सजावटी पौधा है, जिसे एयर प्लांट भी कहते हैं। लैटिन अमेरिका का यह पौधा जीने के लिए न मिट्टी चाहता है, न पानी, और अनोखे आकार और कथित रूप से आसान देखभाल के कारण पौधों के शौकीनों को पसंद है। लेख में पूर्वी जावा के कोटा बातू के उत्पादक ओपिक का ज़िक्र है।
ओपिक के अनुसार, इसकी देखभाल का राज़ सही पानी और अच्छा हवा का प्रवाह है। अगर हर दिन पानी दिया जाए, तो पौधा ठीक से नहीं बढ़ता और पत्तियाँ ऊपर की ओर झुक जाती हैं। सही पानी देने पर पत्तियाँ समान रूप से नीचे की ओर बढ़ती हैं और उनका मुड़ाव ज़्यादा सुंदर लगता है। वे इसे खुली जगह पर रखने की भी सलाह देते हैं जहाँ हवा लगे, क्योंकि इससे जड़ें तेज़ी से बढ़ती हैं, हालाँकि पुरानी पत्तियाँ जल्दी सूख सकती हैं।
कीमतें काफी दिलचस्प हैं। शुरुआती लोगों के लिए झुंड वाला Lonantha लगभग 1.5 लाख रुपये का है, और तने वाला Cotton Candy 25 से 30 हज़ार रुपये का। संग्रहकर्ताओं के लिए Xerographica के पिल्ले 1.5 से 6 लाख रुपये में बिकते हैं। बिना फूल वाला बड़ा Xerographica Long Hair 35 से 40 लाख रुपये का है, और बहुत लंबे नमूने 80 लाख रुपये तक जा सकते हैं। Streptophylla को उन किस्मों में बताया गया है जिनकी संग्रहकर्ता तलाश करते हैं।
लेख में मुझे सबसे अच्छा जीवन-चक्र का वर्णन लगा। फूल आने के बाद पौधा बढ़ना बंद कर देता है और अपनी ऊर्जा नए पिल्ले बनाने में लगाता है, लगभग 15 तक, फिर उसका जीवन समाप्त हो जाता है। इसलिए ऊँची कीमत समझ में आती है, क्योंकि ऐसा पौधा बड़ा होने में बहुत समय लेता है।
स्रोत: detikJatim
कुछ समय पहले मुझे Garden Media Group की रिपोर्ट Garden Trends Report 2026 पर आधारित Homes & Gardens का एक लेख मिला, और उसका एक दावा मेरे मन में अटक गया: घरेलू पौधों को अब संग्रहणीय वस्तुओं की तरह देखा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे लोग पुराने कैमरे या डिज़ाइनर भरे खिलौने जमा करते हैं।
रिपोर्ट इसे "जानबूझकर की गई अव्यवस्था" कहती है। लोग, खासकर Gen Z और मिलेनियल, पौधों का अपना निजी संग्रहालय बना रहे हैं और दुर्लभ किस्मों, नई पत्ती के रंगों और चितकबरी पत्तियों का पीछा कर रहे हैं। लेख में उद्धृत एक पंक्ति कहती है कि पौधे जमा करना नया Pokémon है, क्योंकि यह गेमिंग वाली उपलब्धि, प्रगति और नियंत्रण की भावनाओं को छूता है। एक और पंक्ति इसे धीमी खुशी कहती है, और मुझे लगता है कि इस शौक़ का यह सबसे अच्छा संक्षिप्त वर्णन है जो मैंने पढ़ा है।
लेखिका फिर शुरुआती संग्रह के लिए छह पौधे गिनाती हैं: कंघी जैसी बनावट वाला Euphorbia lactea 'Mermaid Tail', गुलाबी किनारी वाला Aglaonema 'Khanza Pink', दाँतेदार पत्तियों वाला Philodendron 'Jungle Boogie', ज़ेब्रा प्लांट, क्रीम और हरे रंग वाला Monstera 'Thai Constellation', और छोटी पत्तियों वाला String of Turtles। वह यह भी कहती हैं कि दोस्तों से मिले उपहार और कटिंग हर पौधे को एक कहानी देते हैं।
इस लेख में मुझे जो नज़रिया पसंद है, वह है एक ऐसा जीवित संग्रह जो सालों चलता है, न कि कोई क्षणिक चलन। लेख सितंबर 2025 में 2026 की रिपोर्ट से पहले प्रकाशित हुआ था, इसलिए इसे एक पूर्वानुमान की तरह पढ़ा जाता है। यह याद भी दिलाता है कि चितकबरे और असामान्य पौधों को पैसे से ज़्यादा धैर्य चाहिए।
स्रोत: Homes & Gardens
सफ़ेद पत्तियों या सफ़ेद पत्ती-हिस्सों वाले पौधे इन दिनों हर जगह दिख रहे हैं, और कुछ नमूनों की कीमतें भी उसी हिसाब से ऊँची हैं। ZDF के बागवानी विशेषज्ञ Elmar Mai बताते हैं कि इसके पीछे क्या है और कौन-से सस्ते विकल्प मौजूद हैं।
सफ़ेद पौधे-हिस्सों की समस्या यह है कि उनमें क्लोरोफिल नहीं होता, जो प्रकाश-संश्लेषण के लिए ज़रूरी है। इसलिए रंगीन पत्तियों वाले पौधे अक्सर कम जीवंत होते हैं और उन्हें ज़्यादा रोशनी और देखभाल चाहिए। पूरी तरह सफ़ेद पौधे अकेले जी ही नहीं सकते, उन्हें उसी प्रजाति के स्वस्थ पौधे पर ग्राफ़्ट करना पड़ता है। अधिकतर ये किसी आनुवंशिक दोष वाली साइड शूट होती हैं, इसीलिए ये बहुत दुर्लभ हैं।
मॉन्स्टेरा के बारे में दो बातें जाननी चाहिए। लेख के अनुसार थाई मॉन्स्टेरा जैसे खास रूप प्रयोगशालाओं से आते हैं, जहाँ ऊतक संवर्धन से कोशिकाओं का प्रसार किया जाता है। साथ ही रंगीन पत्तियाँ अक्सर आनुवंशिक रूप से अस्थिर होती हैं, इसलिए सफ़ेद हिस्से कम हो सकते हैं या पूरी तरह गायब हो सकते हैं। गार्डन सेंटर में बिकने वाली रंगीन किस्में, जैसे मनीप्लांट, सस्ती और आम तौर पर ज़्यादा स्थिर होती हैं।
देखभाल के लिए 20 से 25 डिग्री और अधिक नमी आदर्श है। सफ़ेदी की मात्रा के अनुसार पौधों को ज़्यादा रोशनी चाहिए, पर वे सीधी धूप नहीं सह सकते। मिट्टी ढीली और अच्छी तरह हवादार होनी चाहिए, और पानी जमने से बचना चाहिए। सस्ते विकल्पों के रूप में Fittonia और Maranta बताए गए हैं। मुझे यह सलाह उपयोगी लगती है: महंगी दुर्लभ किस्म खरीदने से पहले उसकी धारियों या रंग-पैटर्न की स्थिरता के बारे में सोच लेना।
स्रोत: ZDFheute
वर्षों तक मॉन्स्टेरा डेलिसियोसा इंटीरियर सजावट की रानी रहा, लेकिन छोटे होते घरों में उसका आकार एक समस्या बन गया है। Meteored Chile उसके उत्तराधिकारी के रूप में फिलोडेंड्रॉन बर्किन का सुझाव देता है, जो अधिक संक्षिप्त और देखभाल में आसान पौधा है।
बर्किन फिलोडेंड्रॉन जीनस का एक उष्णकटिबंधीय संकर है, जिसकी बनावट सुव्यवस्थित है और जिसकी चमकदार गहरी हरी पत्तियों पर सफेद धारियाँ होती हैं। हर पत्ती का पैटर्न अलग होता है। यह धीरे बढ़ता है, इसलिए इसे लगभग छंटाई की ज़रूरत नहीं होती, और इसे न बड़े गमले चाहिए न सीधी धूप। यह कम रोशनी और नियंत्रित नमी सह लेता है, इसलिए यह दफ्तरों और फ्लैट्स के लिए अच्छा है।
देखभाल के बारे में लेख चमकदार, अप्रत्यक्ष रोशनी की सलाह देता है, जैसे पारदर्शी पर्दे वाली खिड़की के पास, और सीधी धूप से बचने की। पानी संतुलित दें, केवल तब जब मिट्टी की ऊपरी कुछ सेंटीमीटर सूख जाएँ, और सर्दियों में इसे आधा कर दें। आदर्श मिट्टी पीट, परलाइट और बारीक छाल का हल्का मिश्रण है। लेख में अन्य लोकप्रिय पौधों का भी ज़िक्र है: फिलोडेंड्रॉन पिंक प्रिंसेस, व्हाइट प्रिंसेस और ब्राज़ील, कैलेथिया ऑर्बिफोलिया और अलोकेसिया पॉली।
मुझे लगता है यह पसंद में एक समझदार बदलाव है। उष्णकटिबंधीय भरमार के वर्षों के बाद, दिलचस्प पत्तियों वाले ऐसे पौधों की तलाश स्वाभाविक है जो पूरा कमरा न घेरें।
स्रोत: Meteored Chile
गर्मी के बीच में मॉनस्टेरा अपनी बढ़त के चरम पर होना चाहिए, और उसकी पत्तियाँ कुछ ही दिनों में खुल जानी चाहिए। अगर आपका पौधा तीन-चार हफ़्तों से बिना नई कली या स्पैथ के ठहरा हुआ है, तो Jardiner Malin बताते हैं कि कारण अक्सर वह नहीं होता जो आप सोचते हैं। यह लेख जून 2026 में प्रकाशित हुआ था और सितंबर के अंत में अपडेट किया गया।
पहला दोषी, और सबसे आम भी, वह गमला है जो छोटा हो गया है। जब जड़ें पूरी जगह घेर लेती हैं, तो पौधा पत्तियाँ बनाने की बजाय अपने को बनाए रखने में ऊर्जा लगाता है। जाँच सरल है: गमला उलटा करें। अगर जड़ें ड्रेनेज छेद से बाहर निकल रही हों या घनी परत बना रही हों, तो जवाब मिल गया। दूसरा कारक रोशनी है, क्योंकि उत्तर की ओर खुली खिड़की से तीन मीटर दूर रोशनी उतनी नहीं रहती जितनी लोग सोचते हैं। मॉनस्टेरा छाया सह लेता है, पर उसमें फलता-फूलता नहीं।
तीसरा कारण ग़लत तरीके से पानी देना है। सलाह यह है कि ऊपर की पाँच सेंटीमीटर मिट्टी सूखने तक इंतज़ार करें, फिर जब तक पानी ड्रेनेज छेद से न निकलने लगे, खूब पानी दें। गर्मियों में आम तौर पर हफ़्ते में एक बार काफ़ी होता है।
गमला बदलने के लिए लेख सिर्फ़ चार-पाँच सेंटीमीटर बड़े व्यास का गमला सुझाता है, इससे ज़्यादा कभी नहीं, और ऐसी मिट्टी जो अच्छी तरह निकासी करे और जिसमें एक-तिहाई परलाइट मिला हो। खाद बाद में ही दें, अगस्त के अंत तक हर दो-तीन हफ़्ते में। जो बात मुझे सबसे ज़्यादा याद रही: छोटी, फीकी और बिना कटाव वाली पत्तियाँ रोशनी की कमी का संकेत हैं। सुंदर छेदों वाली पत्तियाँ खोजने वाले संग्रहकर्ताओं के लिए यह उपयोगी है।
स्रोत: Jardiner Malin
एलोकेसिया की पत्तियाँ विशाल तीर के आकार की होती हैं, उनके लगभग काले फलक पर चाँदी जैसी शिराएँ होती हैं, और सतह पीटे हुए चमड़े जैसी लगती है। यह विविधता खेती में भी दिखती है: कुछ प्रजातियाँ छोटी गलतियाँ माफ़ कर देती हैं, जबकि कुछ ज़्यादा पानी, ठंड या कम रोशनी पर जल्दी प्रतिक्रिया देती हैं। Jardineiro.net ने 12 प्रजातियों को सबसे सरल से सबसे माँग वाली तक क्रम में रखा है।
एरेसी परिवार के एलोकेसिया वंश में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय एशिया तथा ओशिनिया के कुछ हिस्सों की लगभग सौ प्रजातियाँ आती हैं। लेख बताता है कि बाज़ार में प्रजातियाँ, किस्में और संकर आपस में मिल जाते हैं: Alocasia melo, longiloba और sanderiana प्रजातियाँ हैं, जबकि Polly longiloba और sanderiana के संकर से जुड़ी एक किस्म है। यह भी चेताता है कि हाथी का कान एलोकेसिया का पर्यायवाची नहीं है, क्योंकि यह नाम बड़ी पत्तियों वाले दूसरे एरेसी पौधों के लिए भी इस्तेमाल होता है।
सूची Alocasia macrorrhizos से शुरू होती है, एक ताकतवर दैत्य जो अच्छी तरह उबरता है, पर छोटे कमरे के लिए बहुत बड़ा हो जाता है। बीच में wentii, longiloba, sinuata और Jacklyn जैसी प्रजातियाँ हैं, और अंत के पास Black Velvet और melo जैसी नाज़ुक प्रजातियाँ, तथा आखिरी स्थान पर Alocasia nebula, जिसमें गलती की गुंजाइश बहुत कम है।
एक सुझाव मेरे मन में बैठ गया: जब नया लाया पौधा पत्तियाँ गिराए, तो एक साथ कई चीज़ें न बदलें। गमला बदलना, खाद देना और ज़्यादा पानी देना एक साथ करने के बजाय पहले जड़ों की मिट्टी जाँचें। कठिनाई के क्रम में दी गई सूची अच्छी लगी, जो पहली एलोकेसिया चुनने में निराशा से बचाती है।
कई लोग मानते हैं कि दक्षिण मुखी खिड़की की चौखट इनडोर पौधों के लिए सबसे अच्छी जगह है। «Botanichka» के एक लेख में लेखिका अनास्तासिया विसोत्स्काया बताती हैं कि समस्या खिड़की की नहीं, बल्कि कई कारकों के मेल की है: चौखट के नीचे का रेडिएटर, पत्तियों के पास का ठंडा काँच और शरद ऋतु की नीची धूप। मुझे उनका सरल परीक्षण पसंद आया: हीटिंग चालू हो तो हथेली पत्तियों के पास ले जाएँ और सुबह-सुबह काँच को छुएँ।
चार पौधे ख़तरे में हैं। स्पैथिफ़िलम के काँच के पास वाले पत्तों पर पहले हल्के और फिर भूरे धब्बे पड़ते हैं, और लटकी हुई पत्तियों का मतलब हमेशा प्यास नहीं होता, इसलिए पहले उँगली से मिट्टी जाँचें। कैलेथिया (गोएपर्टिया) सूखे किनारों और फीकी धारियों से प्रतिक्रिया देती है; उसे नरम, ठहरा हुआ पानी और चौखट से एक से डेढ़ मीटर दूर जगह चाहिए। नेफ़्रोलेपिस की छोटी पत्ती-खंडियाँ झड़ती हैं, ख़ासकर रेडिएटर के ऊपर लटकते गमले में। बेंजामिन फ़िकस ठंड, हवा के झोंकों और गरम हवा से पत्तियाँ गिराता है।
आम सलाह है कि पौधे को गर्मी से दूर रखें, पर रोशनी बनी रहे। आमतौर पर 30 से 50 सेंटीमीटर काफ़ी है, कभी-कभी एक मीटर। गमलों को सीधे रेडिएटर पर न रखें; नीचे कॉर्क या लकड़ी का तख़्ता रखें। लेखिका के अनुसार छिड़काव से मुश्किल से फ़र्क पड़ता है, पर ह्यूमिडिफ़ायर साफ़ तौर पर बेहतर काम करता है।
लेख में एक ईमानदार चेतावनी भी है: अगर रेडिएटर नहीं है, पत्तियाँ स्वस्थ हैं और रोशनी काफ़ी है, तो पौधे को हटाने की ज़रूरत नहीं। सूखे किनारे और जले निशान ठीक नहीं होते, उन्हें सावधानी से काटा जा सकता है, और बिना धब्बों वाली नई पत्तियाँ बताएँगी कि जगह सही है। कैलेथिया जैसी नाज़ुक प्रजातियाँ पालने वालों के लिए हीटिंग सीज़न से पहले यह अच्छी याद दिलाने वाली बात है।
स्रोत: Botanichka
दुर्लभ पौधों की दुनिया पर नज़र रखने वालों ने सफ़ेद धब्बों वाली पत्तियों के लिए बेतुकी कीमतें ज़रूर देखी होंगी। मैंने एक गाइड पढ़ी जो इस उलझन में व्यवस्था लाती है, और मुझे वह उपयोगी लगी क्योंकि वह सही सवाल से शुरू होती है: आखिर रंग-बिरंगापन होता क्या है? लेखिका याद दिलाती हैं कि 2021 में न्यूज़ीलैंड में एक ऑनलाइन नीलामी में रंग-बिरंगी मॉन्स्टेरा डेलिसियोसा की एक अलग पत्ती ब्राज़ीलियाई रियाल में बीस हज़ार से ज़्यादा में बिकी थी, लेकिन रंग-बिरंगे पौधे की कीमत हमेशा एक ही ढर्रे पर चलती है: दुर्लभता, सोशल मीडिया पर चरम, बड़े पैमाने पर प्रसार, और फिर गिरावट।
लेख प्रकारों को अलग करता है। मॉन्स्टेरा अल्बो और पिंक प्रिंसेस जैसी कैमेरिक रंगत अस्थिर होती है। थाईलैंड में ऊतक संवर्धन से निकली मॉन्स्टेरा 'Thai Constellation' जैसी मोज़ेक रंगत कहीं ज़्यादा पूर्वानुमेय है, और इसी वजह से वह सस्ती हो गई। स्किंडैप्सस पिक्टस की परावर्तक रंगत और पुराने फ़िलोडेंड्रॉन पिंक कोंगो जैसे रासायनिक रूप से प्रेरित रंग भी हैं, जिनकी पत्तियाँ कुछ महीनों में फिर हरी हो जाती थीं।
सूची सबसे सुलभ से लेकर सबसे नखरीले तक जाती है: जिबोया N'Joy, रंग-बिरंगा ज़ामियोकुल्कास, सिंगोनियम अल्बो वेरिगेटम, मॉन्स्टेरा 'Thai Constellation', फ़िलोडेंड्रॉन 'Pink Princess', कैलेथिया 'White Fusion' और मॉन्स्टेरा एडानसोनी 'Variegata'। पिंक प्रिंसेस पर दी गई सलाह मुझे पसंद आई: उसे पत्ती देखकर नहीं, तना देखकर खरीदें, क्योंकि गाँठों के बीच के गुलाबी धारियाँ रंग बनाए रखने की बेहतर संभावना दिखाती हैं।
धोखाधड़ी की चेतावनी भी काम की है: मॉन्स्टेरा अल्बो के बीज, रंगे हुए पौधे (परीक्षण है कि किसी छिपी जगह पर गीली उँगली रगड़ें) और बिना किसी रंग-बिरंगी गाँठ वाली कलमें। निष्कर्ष मुझे परिपक्व लगा: पौधा कोई वित्तीय संपत्ति नहीं है, और खरीदने का सबसे अच्छा समय आमतौर पर कीमत गिरने के बाद होता है। शुरुआती लोगों के लिए समझदारी भरा विकल्प N'Joy या सिंगोनियम है।
स्रोत: Jardineiro.net