पालतू जानवर

रेप्टाइल व्यापारी ओमानी स्पाइनी-टेल्ड छिपकली के पीछे क्यों पड़े हैं?

मैंने Al Jazeera Net की एक रिपोर्ट पढ़ी, जो ओमानी स्पाइनी-टेल्ड छिपकली के बारे में है। यह छिपकली विदेशी पालतू जानवरों के बाज़ार में बेहद मांग में आ गई है। रिपोर्ट में वे बातें हैं जो किसी भी ऐसे व्यक्ति को जाननी चाहिए जो कोई दुर्लभ जानवर खरीदने का सोच रहा है।

रिपोर्ट पृष्ठभूमि से शुरू होती है। कुछ महीने पहले ओमानी पुलिस ने मस्कट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इस छिपकली की तस्करी का प्रयास विफल किया था। वर्ष 2012 में ओमान से आ रहे एक यात्री को म्यूनिख हवाई अड्डे पर दर्जनों छिपकलियों के साथ पकड़ा गया था। लेखक ने हाल के बिक्री विज्ञापन देखे, जिनमें प्रति जानवर कीमत 700 से 1,000 यूरो के बीच थी: जर्मनी में 999 यूरो, ऑस्ट्रिया में 700, फ्रांस में 800 और ग्रीस में 1,000 यूरो।

यह छिपकली ओमान के सीमित तटीय और रेगिस्तानी इलाकों में ही रहती है। यह स्थानिक (एंडेमिक) प्रजाति है, जो ज़मीन में बिल खोदती है और अपना अधिकांश जीवन उन्हीं में बिताती है। लंबे समय तक वैज्ञानिकों के पास इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं थी। जर्मन सरीसृप विज्ञानी थॉमस विल्म्स ने 2002 के एक अध्ययन में अनुमान लगाया कि 1998 में शोध शुरू होने से पहले विज्ञान को ज्ञात नमूनों की संख्या तीस से अधिक नहीं थी। फिर एक वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रम शुरू हुआ और कैद में पहली सफल प्रजनन का दस्तावेज़ीकरण हुआ। शौकीन इसे इस बाज़ार की शुरुआत मानते हैं।

सबसे चौंकाने वाला मुद्दा "स्रोत की लॉन्ड्रिंग" है। बगदाद विश्वविद्यालय के डॉ. उमर अल-शेखली मानते हैं कि कैद में सफल प्रजनन को जंगली जानवरों की तस्करी के लिए आड़ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें कैद में पैदा हुआ बताया जाता है। Pro Wildlife संगठन की रिपोर्ट "चुराए गए जंगली जीव 2" ने ओमान के घोषित निर्यात और अन्य देशों के रिकॉर्ड में कैद-प्रजनित दर्ज संख्याओं के बीच बड़े अंतर की ओर इशारा किया: अमेरिका में 182, स्विट्ज़रलैंड में 130 और नीदरलैंड में 120।

ओमान के पर्यावरण प्राधिकरण ने 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में इस छिपकली को पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजाति और शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का अहम संकेतक बताया है। मेरा निष्कर्ष सीधा है: दुर्लभता कीमत बढ़ाती है, और ऊँची कीमत जंगल में इस जानवर के लिए खतरा बढ़ाती है। इसलिए कोई भी विदेशी जानवर खरीदने से पहले पूछना चाहिए कि वह कहाँ से आया है।

स्रोत: Al Jazeera Net

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