89 साल की स्पेनिश दादी ने पहली बार उड़ान भरी और रोम देखा
कुछ यात्रा-समाचार सुबह-सुबह ही चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं, और NiT की यह कहानी उन्हीं में से एक है। 89 साल की स्पेनिश दादी मानोलिता हमेशा से रोम देखना चाहती थीं, और उनके पोते जॉर्डी रोड्रिगेज मोरेनो, जो उनके साथ बने वीडियो से जाने जाते हैं, ने यह सपना पूरा करने का फ़ैसला किया।
इस यात्रा का ख़ास महत्व है: यह मानोलिता की पहली उड़ान है और पहली बार वे स्पेन से बाहर जा रही हैं। उनके सपने में शहर की गलियों में घूमना, स्थानीय खाना चखना और वेटिकन जाना शामिल था। जॉर्डी ने लेख छपने से एक हफ़्ते पहले एक भावुक वीडियो में यात्रा की घोषणा की थी।
उसके बाद के दिनों में उन्होंने छोटे-छोटे पल साझा किए: विमान में वे, होटल में, रोम में पहली बार कार्बोनारा खाते हुए, और कोलोसियम घूमते हुए। वेटिकन जाने और शहर को इत्मीनान से देखने की योजना भी थी। लेख में यात्रा की तारीख़ें, अवधि या ख़र्च नहीं बताए गए, इसलिए मैं कहानी का सार ही लिख रहा हूँ।
जो बात दिल को छूती है, वह इसकी सादगी है। यह न कोई आलीशान यात्रा है, न पैसे बचाने के नुस्ख़े; यह 89 साल की एक महिला है, जो दशकों से सँजोए गए एक पहले अनुभव को जी रही है। जो लोग विदेश में रहते हैं या जिनके बुज़ुर्ग रिश्तेदार घर से दूर हैं, उनके लिए यह याद दिलाने वाली बात है कि जिस यात्रा को टालते आए हैं, उसके लिए कभी देर नहीं होती।
अगर आपके दादा-दादी या माता-पिता के मन में कोई सपनों की जगह है, तो शायद यही मौक़ा है यह पूछने का कि वे कहाँ जाना चाहेंगे।
स्रोत: NiT
इस यात्रा का ख़ास महत्व है: यह मानोलिता की पहली उड़ान है और पहली बार वे स्पेन से बाहर जा रही हैं। उनके सपने में शहर की गलियों में घूमना, स्थानीय खाना चखना और वेटिकन जाना शामिल था। जॉर्डी ने लेख छपने से एक हफ़्ते पहले एक भावुक वीडियो में यात्रा की घोषणा की थी।
उसके बाद के दिनों में उन्होंने छोटे-छोटे पल साझा किए: विमान में वे, होटल में, रोम में पहली बार कार्बोनारा खाते हुए, और कोलोसियम घूमते हुए। वेटिकन जाने और शहर को इत्मीनान से देखने की योजना भी थी। लेख में यात्रा की तारीख़ें, अवधि या ख़र्च नहीं बताए गए, इसलिए मैं कहानी का सार ही लिख रहा हूँ।
जो बात दिल को छूती है, वह इसकी सादगी है। यह न कोई आलीशान यात्रा है, न पैसे बचाने के नुस्ख़े; यह 89 साल की एक महिला है, जो दशकों से सँजोए गए एक पहले अनुभव को जी रही है। जो लोग विदेश में रहते हैं या जिनके बुज़ुर्ग रिश्तेदार घर से दूर हैं, उनके लिए यह याद दिलाने वाली बात है कि जिस यात्रा को टालते आए हैं, उसके लिए कभी देर नहीं होती।
अगर आपके दादा-दादी या माता-पिता के मन में कोई सपनों की जगह है, तो शायद यही मौक़ा है यह पूछने का कि वे कहाँ जाना चाहेंगे।
स्रोत: NiT
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