कुत्तों और बिल्लियों की चिचड़ी और पिस्सू पूरे परिवार में बीमारी फैला सकते हैं
मैंने Thanh Niên में पालतू जानवरों की चिचड़ी और पिस्सू की समस्या पर एक लेख पढ़ा, और इसे साझा करना चाहता था, क्योंकि आज भी बहुत लोग इसे सिर्फ़ कुत्तों और बिल्लियों की समस्या मानते हैं।
लेख के अनुसार ह्यू के एक पशु अस्पताल में चिचड़ी और पिस्सू से फैलने वाले रक्त परजीवी रोग के मामले लगातार आ रहे हैं। MB Vet Huế पशु अस्पताल के निदेशक डॉ. ट्रान कोंग बांग ने कहा कि सिर्फ़ दो हफ़्तों में अस्पताल ने इस बीमारी से पीड़ित 30 से ज़्यादा कुत्तों का इलाज किया, और उन्होंने स्थिति को चिंताजनक बताया। चिचड़ी बेबेसिया और एहरलिकिया नामक रक्त परजीवी फैलाती हैं, जिससे कुत्तों को तेज़ बुखार, नाक से खून और पेशाब में खून आता है, और समय पर इलाज न हो तो मौत हो सकती है। कई कुत्ते क्लिनिक लाए जाने के बाद ही मर चुके थे, क्योंकि उनके मालिकों ने लापरवाही बरती थी।
इंसानों के लिए ख़तरा भी उतना ही अहम है। ज़मीन पर गिरी चिचड़ी बिस्तर पर चढ़कर किसी इंसान को काट सकती है, जिससे धब्बेदार बुखार या लाइम रोग हो सकता है। बच्चों में कुत्तों और बिल्लियों के गोल कीड़े (Toxocara) लंबे समय तक त्वचा में खुजली, पित्ती, खाँसी, धुंधला दिखना और यहाँ तक कि दौरे भी पैदा कर सकते हैं। जानवरों के मल वाली ज़मीन पर नंगे पैर चलने से हुक वर्म त्वचा से शरीर में घुस जाते हैं, और कुत्ते का टेपवर्म (Echinococcus) लिवर और फेफड़ों में सिस्ट बना सकता है, जिसके लिए आम तौर पर सर्जरी करनी पड़ती है।
डॉ. बांग कुछ ठोस सलाह देते हैं: नियमित रूप से कीड़े की दवा दें (पिल्ले और बिल्ली के बच्चे तीन महीने की उम्र तक हर दो हफ़्ते में, फिर छह महीने तक हर महीने, और बड़े कुत्ते हर तीन महीने में), कच्चा मांस न खिलाएँ, पालतू जानवर को ऐसी जगह न घूमने दें जहाँ दूसरे जानवरों का मल हो, पालतू के साथ खेलने के बाद साबुन से हाथ धोएँ, हर दिन मल साफ़ करें और फ़र्श को कीटाणुरहित करें। जब तक चिचड़ी और कीड़े पूरी तरह नियंत्रित न हों, तब तक जानवर को चेहरा न चाटने दें और न ही आपके बिस्तर पर सोने दें। अगर किसी बच्चे को पालतू जानवर के संपर्क के बाद बार-बार त्वचा में खुजली या पित्ती होती है, तो उसकी जाँच करानी चाहिए।
मेरे लिए लेख का संदेश सीधा है: पालतू जानवर की अच्छी देखभाल करना पूरे परिवार की सेहत की देखभाल करना भी है।
स्रोत: Thanh Niên
लेख के अनुसार ह्यू के एक पशु अस्पताल में चिचड़ी और पिस्सू से फैलने वाले रक्त परजीवी रोग के मामले लगातार आ रहे हैं। MB Vet Huế पशु अस्पताल के निदेशक डॉ. ट्रान कोंग बांग ने कहा कि सिर्फ़ दो हफ़्तों में अस्पताल ने इस बीमारी से पीड़ित 30 से ज़्यादा कुत्तों का इलाज किया, और उन्होंने स्थिति को चिंताजनक बताया। चिचड़ी बेबेसिया और एहरलिकिया नामक रक्त परजीवी फैलाती हैं, जिससे कुत्तों को तेज़ बुखार, नाक से खून और पेशाब में खून आता है, और समय पर इलाज न हो तो मौत हो सकती है। कई कुत्ते क्लिनिक लाए जाने के बाद ही मर चुके थे, क्योंकि उनके मालिकों ने लापरवाही बरती थी।
इंसानों के लिए ख़तरा भी उतना ही अहम है। ज़मीन पर गिरी चिचड़ी बिस्तर पर चढ़कर किसी इंसान को काट सकती है, जिससे धब्बेदार बुखार या लाइम रोग हो सकता है। बच्चों में कुत्तों और बिल्लियों के गोल कीड़े (Toxocara) लंबे समय तक त्वचा में खुजली, पित्ती, खाँसी, धुंधला दिखना और यहाँ तक कि दौरे भी पैदा कर सकते हैं। जानवरों के मल वाली ज़मीन पर नंगे पैर चलने से हुक वर्म त्वचा से शरीर में घुस जाते हैं, और कुत्ते का टेपवर्म (Echinococcus) लिवर और फेफड़ों में सिस्ट बना सकता है, जिसके लिए आम तौर पर सर्जरी करनी पड़ती है।
डॉ. बांग कुछ ठोस सलाह देते हैं: नियमित रूप से कीड़े की दवा दें (पिल्ले और बिल्ली के बच्चे तीन महीने की उम्र तक हर दो हफ़्ते में, फिर छह महीने तक हर महीने, और बड़े कुत्ते हर तीन महीने में), कच्चा मांस न खिलाएँ, पालतू जानवर को ऐसी जगह न घूमने दें जहाँ दूसरे जानवरों का मल हो, पालतू के साथ खेलने के बाद साबुन से हाथ धोएँ, हर दिन मल साफ़ करें और फ़र्श को कीटाणुरहित करें। जब तक चिचड़ी और कीड़े पूरी तरह नियंत्रित न हों, तब तक जानवर को चेहरा न चाटने दें और न ही आपके बिस्तर पर सोने दें। अगर किसी बच्चे को पालतू जानवर के संपर्क के बाद बार-बार त्वचा में खुजली या पित्ती होती है, तो उसकी जाँच करानी चाहिए।
मेरे लिए लेख का संदेश सीधा है: पालतू जानवर की अच्छी देखभाल करना पूरे परिवार की सेहत की देखभाल करना भी है।
स्रोत: Thanh Niên
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